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कैसे होगी गेंहू की खरीद, कहीं बोरा तो कहीं पर पैसा का है अभाव

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चंदौली। जिले में गेहूं खरीद बोरे और धन के अभाव में प्रभावित हो रही है। एक अप्रैल से 15 जून तक 66 हजार 600 मीट्रिक टन की खरीद की जानी है लेकिन एक पखवारे में जिले में मात्र तीन हजार कुंतल गेहूं ही खरीद हो पाई है। जबकि प्रति दिन लगभग पांच हजार आठ सौ कुंतल कर खरीद होनी चाहिए मगर अभी तक एक दिन के बराबर भी खरीद नहीं हो सकी है। जिले में शासन की ओर से सात एजेंसियों के 58 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, लेकिन अधिकतर केंद्रों पर बोरे का अभाव बना हुआ है।
पीसीएफ विभाग के 22 क्रय केंद्रों पर 20 हजार 200 मीट्रिक टन, खाद्य विभाग के नौ केंद्रों पर 7900 मीट्रिक टन, यूपी एग्रो के छह केंद्रों पर 2300 मीट्रिक टन, कर्मचारी कल्याण निगम के चार क्रय केंद्रों पर 3000 मीट्रिक टन, एनसीसीएफ के छह केंद्रों पर 8000 मीट्रिक टन, नैफेड के पांच केंद्रों पर 7000, पीसीयू के चार केंद्रों पर 7200 व भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्रों पर 11000 मीट्रिक टन गेंहू के खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पीसीएफ के अधिकांश केंद्रों अभी तो गेंहू खरीद के पोस्टर भी नहीं लग पाए हैं। इससे किसानों के सामने असमंजस कि स्थिति बनी हुई है कि इस बार वह क्रय केंद्र है कि नहीं। एनसीसीएफ व नैफेड के पास बोरे ही नहीं है। इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गेहूं खरीद की रफ्तार 15 अप्रैल के बाद से ही होती है। बोरे की कमी को दूर कर लिया गया है। पुराने एक लाख बोरे विभाग के पास उपलब्ध थे। वहीं मिर्जापुर से 1.5 लाख बोरे मंगाए गए हैं। एक दो दिनों में कोलकाता से बोरे की रैक आ जाएगी। उन्होंने बताया कि पैसा की कमी नहीं है। किसान को 48 घंटे में आरटीजीएस के माध्यम से पैसा खाते में भेजा दिया जाएगा।
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इनसेट-
सहकारी समिति पर खरीद बाधित
कमालपुर। क्षेत्र के अवहीं सहकारी समितियों पर बोरा न होने के कारण गेहूं की खरीद बाधित हो गई है। इसी तरह कमालपुर सहकारी समिति पर भी गेहूं खरीद नहीं हो रही है। कमालपुर सहकारी समिति सचिव रामनरायन ने बताया यहां का भवन जीर्ण शीर्ण हो चुका है। सरकार का आदेश है गेहूं की खरीददारी हर हाल में हो लेकिन बोरा नही मिलने के कारण खरीददारी नही पा रही है। एक हजार बोरा मिला था, इसमें 500 कुंतल गेहूं की खरीद हुई है। किसानों का गेहूं खरीद कर ग्राम सभा के पंचायत भवन में रखा जा रहा है। क्षेत्र के ढ़ोढ़ियां, जनौली, खड़ान, डबरियां ,आदि समितियों का हाल भी खराब है।
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