सकलडीहा। तीन पूर्व लेखपालों और अधिवक्ताओं के बीच हुए विवाद में शुक्रवार को वकीलों और लेखपालों के बीच तहसील सभागार में मारपीट हो गई। जिसमें दो लेखपालों को सिर में गंभीर चोटें आईं। बाद में घटना से क्षुब्ध लेखपालों ने भी तहसील परिसर के बाहर हंगामा किया। इस मामले में लेखपालों ने आधा दर्जन वकीलों के खिलाफ तहरीर दी है। उधर जिला लेखपाल संघ ने अधिवक्ताओं की गिरफ्तारी होने तक कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। तनाव को देखते हुए तहसील परिसर में भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दी गई है।
तीन दिन पूर्व ताजपुर हल्का के लेखपाल प्रदीप सिंह से किसी बात को लेकर डेमोक्रेटिक बार के पूर्व अध्यक्ष रमाशंकर खरवार के कहासुनी हो गई थी। इसके बाद अधिवक्ताओं ने 21 जून को लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। शुक्रवार को सभी लेखपाल तहसील सभागार में कार्य रहे थे कि इसी बीच वकील वहां पहुंचे और विवाद के बाद मारपीट होने लगी। जिसमें लेखपाल प्रदीप सिंह (32) और संजीव सिंह (30) घायल हो गए। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र नाथ, एसडीएम विकास सिंह और सीओ सुनील गुप्ता मौके पर पहुंच गए और लोगों को समझाया बुझाया। इस बाबत अपर पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र नाथ ने बताया कि लेखपालों द्वारा तहरीर दी गई है।
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लेखपालों के समर्थन में अमीन संघ उतरा
सकलडीहा (ब्यूरो) अधिवक्ताओं व लेखपालों के बीच हुई मारपीट में शुक्रवार को लेखपालों को अमीन संघ के प्रान्तीय संयुक्त मंत्री अखिलेश मिश्रा ने समर्थन किया। चेताया कि गिरफ्तारी होने तक अमीन संघ कार्य बहिष्कार करेगा। वहीं लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष ने पूरे जनपद में कार्य बहिष्कार की बात कही है।
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सक्रिय होता प्रशासन तो नहीं होता विवाद
सकलडीहा (ब्यूरो) 21 जून को वकील और लेखपालों के बीच विवाद हुआ था। अधिवक्ताओं ने लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध जताया था। दोनों पक्षों में काफी तनाव की स्थिति थी। तहसील प्रशासन ने इसे संजीदगी से नहीं लिया और नतीजतन दोनों पक्षो में शुक्रवार को विवाद हो गया। चर्चा है कि यदि ऐतिहातन तहसील परिसर में फोर्स तैनात कर दी जाती तो ऐसी स्थिति सामने नहीं आती।