पीडीडीयू नगर। कायस्थ समाज को एक सूत्र में कि पिरोने वाले देवता हैं भगवान चित्रगुप्त। चित्रगुप्त पूजा के माध्यम से कायस्थ समाज के लोग वर्ष भर में एक दिन साथ बैठते हैं और पूजन अर्चन में हिस्सा लेते हैं। मनुष्य के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त पूजा इस वर्ष नौ नवंबर को है और इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
जिलेभर में कायस्थों की आबादी 10,000 से अधिक है। चित्रगुप्त की पूजा इनकी महत्वपूर्ण परंपरा है। नगर के बाकले प्रमोदशाला, गया कॉलोनी स्थित मानव सेवा संस्थान और पटेल नगर में धूम धाम से इसकी पूजा की जाती है भैया दूज वाले दिन समाज के लोग कलम दवात की पूजा कर उसे चित्रगुप्त महाराज को अर्पित करते हैं। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविनंदन सहाय और राष्ट्रीय मंत्री शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रह्मा ने सृष्टि के निर्माण के बाद 11000 वर्षों तक तपस्या की। इसी दौरान उनकी काया में श्याम वर्ण, कमलनयन, चारभुजा धारी, हाथ में दंड, कलम दवात और शस्त्र लिए दिव्य पुरुष उत्पन्न हुए। ब्रह्मा ने कहा कि आप मेरी काया से उत्पन्न हुए हैं, इसलिए आप कायस्थ हुए। आपका वंश कायस्थ कहलाएगा। कहा आप पाप पुण्य का लेखा जोखा के आधार पर भाग्य तय करेंगे। इस तरह आपका नाम चित्रगुप्त होगा। भगवान चित्रगुप्त न सिर्फ पाप पुण्य का लेखा जोखा रखते हैं बल्कि कायस्थों को एक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। नगर में तीन स्थानों पर सार्वजनिक रूप से चित्रगुप्त पूजा होती है। इसकी तैयारी तेजी से चल रही है।