चकिया। आखर साहित्य के तत्वावधान में सोमवार की रात विकास खंड के दूबेपुर गांव में कवि मनोज द्विवेदी मधुर की ओर से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें ख्याति प्राप्त कवियों ने काव्य पाठ कर रंग जमाया। कवि सम्मेलन की शुरूआत कवियत्री विभा सिंह के सरस्वती वंदना ‘‘वीणा वाली जननी भवानी मां‘‘ से हुआ। कवि सम्मेलन के पहले पायदान पर आए कवि नरसिंह साहसी ने ‘‘देश अपना है इसे लूट करके खा जाओ‘‘ ओमप्रकाश यादव ने ‘‘सूरज चांद रहे जब तक लहरात रहे गंगा क पानी‘‘ सुनाया। वहीं धर्मदेव चंचल ने ‘‘वीेरों ने वीरता की कहानी लिखी, दे के अपनी शहादत रवानी लिखी‘‘ सुनाकर लोगों को वीर रस से ओत-प्रोत किया। वहीं मनोज द्विवेदी मधुर ने ‘‘प्रीत के रंग में रंग दे, मै बनू तेरा तू मेरा अंग में अंग दे‘‘ सुनाकर लोगों को गीत काव्य की झलक दिखाई। नागेश शांडिल्य ने ‘‘देखा आपने हर कोई कोई न कोई सपना पाल रखा है‘‘ सुनाया तो मिथिलेश गहमरी ने ‘‘कब तक होली ईद मनेगी संगीनो के साए में‘‘ सुनाकर सांप्रदायिकता को इंगित किया। हास्य कवि झगडू भईया ने ‘‘ जे जहां भी मिलल दिल जलावत मिलल‘‘ सुनाकर लोगो को हंसाया। नंद कुमार झा नंद ने ‘‘नाम के अनुरूप है तू और प्रेम की मूर्ति बनी लगती हो‘‘ सुनाया। कमलेश राजहंस ने ‘‘जो राष्ट्रवृक्ष की शाखाओं को काटे उसको माफ करूं?‘‘ सुनाकर लोगों को राष्ट्र प्रेम का पाठ पढ़ाया। कवि सम्मेलन में गरिमा मिश्र, सुरेन्द्र मिश्र अंकुर, स्वतंत्र श्रीवास्तव नवल, कमलेश्वर कमल, कृष्णानंद द्विवेदी गुलाब, डा. हौशिला प्रसाद द्विवेदी, शारदा प्रसाद द्विवेदी ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश राजहंस ने किया।