चंदौली। सरकार ने लोक शिक्षा प्रेरकों के नवीनीकरण पर तीस सितंबर से रोक लगा दी है। जबकि प्रेरकों को विगत 32 माह से मानदेय नहीं मिला है। सरकार के निर्णय के बाद एक झटके में बेरोजगार हो चुके जनपद के 1162 शिक्षा प्रेरक लंबित मानदेय के भुगतान की आस में सरकारी कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। जिला साक्षरता प्रभारी का कहना है कि शासन की ओर से जारी पत्र में निर्देश दिया गया है अगला आदेश जारी होने तक कि लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन बंद रहेगा।
निरक्षरों को साक्षर बनाकर विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए वर्ष 2012 में जनपद के 620 लोक शिक्षा केंद्रों पर 1240 पदों के सापेक्ष 1154 प्रेरकों का चयन किया गया था। इसके अतिरिक्त नौ विकास खंडों में पांच ब्लाक समन्वयक और तीन जिला समन्वयक भी साक्षर भारत मिशन से जोड़े गए थे। प्रेरकों को दो हजार और ब्लाक तथा जिला समन्वयकों को छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की व्यवस्था की गई थी। सरकार ने 27 सितंबर को आदेश जारी कर प्रेरकों के नवीनीकरण पर रोक लगा दी। यह भी निर्देश जारी किया गया कि लोक शिक्षा केंद्र तब तक संचालित नहीं किए जाएंगे जब तक सरकार अगला आदेश जारी नहीं करती है। सरकार के इस फैसले से जनपद सहित पूरे प्रदेश के शिक्षा प्रेरक बेरोजगार हो गए हैं। जबकि प्रेरकों को 32 माह से मानदेय भी नहीं दिया गया है। अपने मानदेय और नवीनीकरण की मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन करने के बाद भी प्रेरकों के हाथ कुछ नहीं लग सका। जिला साक्षरता प्रभारी वरुणेंद्र तिवारी ने बताया कि प्रेरकों के मानदेय के लिए सरकार की ओर से अभी बजट नहीं प्राप्त हुआ है। वहीं तीस सितंबर को समाप्त हो रहा प्रेरकों का नवीनीकरण आगे बढ़ाने पर भी सरकार ने रोक लगाई है। बजट और आदेश आने के बाद ही आगे की कार्यवाई की जाएगी।