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किसानों के लिए आलू भंडारण के लिए नहीं है कोई शीतगृह

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चंदौली। जनपद के किसानों के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से उनकी बेहतरी के लिए तमाम वादे भले किए जा रहे हो , लेकनि जिले में एक भी भंडारण केंद्र नहीं है। कृषि बाहुल्य इलाका होने के बाद भी जिले में एक भी शीतगृह नहीं होना यहां के किसानों को आलू का भंडारण करने के लिए दूसरे जनपद का सहारा लेना पड़ता है। नगर पालिका क्षेत्र के नई बस्ती इलाके में एक निजी आलू भंडारण केंद्र था, लेकिन वह भी बंद हो चुका है। वहीं आलू की खेती के बाद उसे औने-पौने दाम पर बेचना किसानों की मजबूरी है। आखिर करें तो क्या करें किसान दिन प्रतिदनि किसानों की समस्या बढ़ती ही जा रही है, वहीं आलू की खेती करने वाले किसानों का मनबल भी गिरता जा रहा है। जनपद कृषि जनपद होने के बाद भी यहां के किसानों के आलू के भंडारण के लिए दर-दर की ठोकर खानी पड़ी है। पहले की अपेक्षा आलू की खेती करने वाले किसान अब इससे मुंह मोड़ते चले जा रहे। आलू के भंडारण के लिए जिले में पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण अक्सर किसानों को औने-पौने दाम में बेचने के लिए विवश होना पड़ता है। वहीं गैर जनपद के कोल्ड स्टोरेज में आलू रखना महंगा साबित होता है। इस वर्ष लगभग 340 हेक्ट्रेयर में ही आलू की बोआई की गई है। जो पिछले वर्ष की तुुलना में 30 हेक्टेयर कम आलू की बोआई हुई। लगभग चार वर्ष पूर्व आलू के भंडारण के लिए एक कोल्डस्टोरज था, लेकिन वह भी बंद हो गया है। किसानों का मनाना है कि इसमें कहीं न कहीं शासन व प्रशासन की लापरवाही है। किसानों का आलू की खेती से अब धीरे-धीरे मोह भंग होता जा रहा है। इसमें कहीं न कहीं किसानों के सामने आलू भंडारण का केंद्र न होना प्रमुख है। बोआई के समय आलू के बीजों का महंगा होना और पैदावार के समय आलू के दामों की कमी भी इसका प्रमुख कारण है। भलदपुरा गांव निवासी किसान साधु शरण व नरायनपुर गांव निवासी लालबहादुर यादव ने कहा पहले आलू की खेती एक दो बीघे करते थे, लेकिन कोई इसके रखने की व्यवस्था नहीं होने पर अब मात्र खाने भर ही खेती करते है। दरवेशपुर निवासी रामकिशुन मौर्य व बसगांवा निवासी अखिलेश सिंह ने कहा कि आलू के भंडारण की समस्या के समाधान करने में सरकार पूरी तरह से असफल है। इसकी व्यवस्था के साथ किसानों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
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