चंदौली। जनपद में रबी की बोआई के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की उपलब्धता का विभाग का दावा खोखला साबित हो रहा है। सहकारी समितियों पर खाद का टोटा बना हुआ है। ऐसे में किसान बाजार से ऊंची कीमत पर उर्वरक खरीदने को विवश हैं। समय से उर्वरक न मिलने से रबी की बुआई करने में परेशानी हो रही है।
किसानों के उर्वरक के लिए कुल 83 साधन सहकारी समितियां हैं। साथ ही मुख्यालय सहित लगभग आधा दर्जन इफको सेवा केंद्र के साथ लगभग कई प्राइवेट उर्वरक की दुकानें हैं। वहीं कृषि विभाग का दावा है कि निजी दुकानों पर 1400 एमटी व सरकारी केंद्रों पर 750 एमटी डीएपी उपलब्ध है। जबकि किसानों की माने तो सहकारी केंद्रों से डीएपी नहीं मिल रही है । इससे किसानों को मजबूरी में बुआई पिछड़े नहीं निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। सदर विकास खंड के बनौली निवासी किसान दीनानाथ सिंह व भदलपुरा निवासी किसान रमेश यादव ने बताया कि गेहूं की बुआई के लिए खेत तैयार है। डीएपी खाद के लिए लगातार समिति का चक्कर लगा रहे हैं। यहां न मिलने पर निजी दुकान से खरीदने को विवश हैं। जसौली निवासी किसान श्यामा प्रसाद व मड़ई पर निवासी मुकेश यादव ने बताया कि डीएपी के बिना रबी फसल की बुआई पिछड़ रही। सरकारी खाद की दुकानों पर रोज चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल रही है। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार भारती का कहना है कि रबी की बुआई के लिए कृषि विभाग गंभीर है। डीएपी कई सहकारी समितियों पर उपलब्ध है। 2700 एमटी डीएपी की रैक आ रही है। इसके आने से सभी सरकारी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाएगी। किसानों का उचित दर पर ही उर्वरक का वितरण होगा, अगर कोई शिकायत मिली तो दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ।