चकिया। मानसून सत्र में रोपे जाने वाले पौधों के संरक्षण की जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयास में प्रदेश सरकार जुटी हुई है। इसके तहत रोपे गए पौधों के पेड़ बनने तक पौधे की देखभाल सुनिश्चित करने की कवायद वन विभाग ने आरंभ कर दी है। इस कवायद के तहत प्रत्येक गांव में रोपे जाने वाले पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को दी गई है। प्रभागीय वनाधिकारी मनोज खरे ने प्रधानों को दायित्व बोध कराने के लिए बैठक शुरू कर दी है।
काशी वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्र में विभाग द्वारा रोपे गए पौधों तथा टेंच में बीज बुआई में उगे पौधो के संरक्षण की जिम्मेदारी विभाग के कर्मचारियों के पर होती है, लेकिन गांवों में रोपे गए पौधे रख-रखाव के अभाव में सूख जाते हैं। मानसून सत्र में जिले में 29 लाख 72 हजार पौधों के रोपे जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2625 पौधों का रोपण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्राम पंचायतों के अलावा गांव के प्राथमिक विद्यालयों, कब्रिस्तानों, मंदिर, मस्जिद के परिसरों तथा ग्राम समाज एवं अन्य खाली जमीनों पर भी पौधरोपण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के अंतर्गत रोपे जाने वाले पौधों को पेड़ बनने तक संरक्षण देने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को सौंपी गई है। इसके तहत प्रत्येक रेंज से 10 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को गत शुक्रवार को प्रभाग के रामनगर मुख्यालय में बुलाकर उनको दायित्व बोध कराया गया। डीएफओ मनोज कुमार खरे ने कहा कि ग्राम पंचायतों में रोपे जाने वाले पौधों के संरक्षण की आवश्यकता होती है। इसलिए ग्राम प्रधानों को रोपे गए पौधों का संरक्षक नियुक्त किया जा रहा है।