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हमें राम नहीं राम के चरित्र की आवश्यकता

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पड़ाव। हमें राम नहीं राम के चरित्र की आवश्यकता है, क्योंकिसमाज में चारित्रिक और नैतिक पतन अपने चरम पर है।यह शिक्षा आज हमारे विद्यालयों से भी गायब हैं। आपसी भाईचारा, प्रेम और सौहार्द्द केसाथ इस देश में कैसे जिया जाय यह बड़ी मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि हमारे देश केसंचालकों की रूचि कुछ और में ही लिप्त जान पडती है। ये बातें अवधूत भगवान राम के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित गोष्ठी में गुरुपद संभव राम ने कहीं।
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महाराज ने कहा कि दशकों पूर्व अघोरेश्वर महाप्रभुने अघोर साहित्य में कहा कि सौरमंडल में एक विचित्र विस्फोट होगा। इससवे संपूर्ण प्रकृति में स्थित जीव जंतु अपनी स्वाभाविक प्रकृति से अलग व्यवहार करते दिखेंगे।यह आजकल दिख रहा है। हमें लकीर का फ़क़ीर नही बनना चाहिए। समय, काल और परिस्थिति के हिसाबसे अपना आचरण और व्यवहार करना होगा। वर्तमान में तमाम धर्मावलंबी अपने-अपने मापदंडों से धर्म कीव्याख्या कर जनमानस को भ्रमित कर एक दूसरे से लड़ा रहे हैं। जबकि धर्म सबको एक दूसरेसे जोड़ता है। कोई भी धर्म कटुता नहीं सिखाता।इस मौके पर भोलानाथत्रिपाठी, वाईपी सिंह, एमएम अग्निहोत्री, डॉ वीपी सिंह,श्रीप्रकाश सिंह ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता आरसी दीपक ने की। संचालन केडी सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमरज्योति ने की।
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