टांडाकला। गंगा के किनारे लगातार हो रहे कटान के कारण के कारण क्षेत्र के हसनपुर तिरगांवा गांव में उमाशंकर और उसके भाइयों का संयुक्त कच्चा मकान गंगा में समाहित हो गया। वहीं मकान के जमीदोज होने के कारण पीड़ित परिवार खुले आसमान में आ गया है। गंगा में कटान के कारण लगभग तीन सौ मीटर जमीन भी गंगा में समाहित हो गई।
क्षेत्र के हसनपुर तिरगांवा गांव में रविवार की शाम तेज आंधी और बरसात के कारण के उमाशंकर, गौरीशंकर, मंटू, और जागेश्वर निषाद का कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। गंगा के तट पर स्थित इन मकानों के अंदर की मिट्टी कट गई थी। ऊपरी सतह पर सभी ठीक होने के कारण किसी को कुछ पता नहीं चला। कटान के कारण तीन सौ मीटर जमीन भी गंगा में समाहित हो गई। कटान के कारण गांव के ही केदारनाथ मिश्र के खेत का एक बड़ा भाग गंगा में समाहित हो गया। वहीं कच्चा मकान गिरने से उसमें सो रहे उमाशंकर निषाद बाल बाल बच गए। लेकिन घर में रखा गृहस्थी का मकान नष्ट हो गया। जिससे उनके परिवार के भरण पोषण की समस्या उत्पन्न गई है। वहीं कटान के कारण कई अन्य मकानों के भी जमीदोज होने की संभावना बनी हुई है।