चंदौली। सदर विकास खंड के मद्धूपुर में श्रीमद्भागवत कथा पुराण के दूसरे दिन सोमवार को कथावाचक अनिरुद्ध प्रसाद त्रिपाठी ने भागवत कथा सुना का उपस्थित भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान हमारे पापों के हरणकर्ता होने से ही हरि हैं। हरि-कथा भागवत पुराण सुनने से पितर परम संतुष्ट होते हैं। अत: उनकी तृप्ति का कारक जो कार्य किंचित त्रुटियों के चलते गया श्राद्ध से भी नहीं हो पाता, वह भी श्रीमद्भागवत पुराण कथा सुनने से सिद्ध हो जाता है। कहा कि प्रत्येक नारायण कथा के तीन स्थायी श्रोता हनुमान, अन्नपूर्णा और विश्वनाथ होते हैं। उनके श्रवण का अर्थ है त्रिलोक सुनता है। ऐसे प्रभु नारायण में लीन व्यक्ति की कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होती। भागवत कथा कृष्ण के रूप में नारायण का गुणगान है और कृष्ण का अर्थ होता है अपनी ओर खींचना अर्थात चुंबकीय आकर्षण। जिनके आराध्य भगवान शिव होते हैं, उन्हें भी कृष्ण का अप्रतिम वैशिष्ट्य अपनी ओर आकर्षित करता है। कहा कि भक्ति और भक्ति-दृष्टि नारायण से तादात्म्य के मार्गदर्शन का नया प्रभामंडल देती है, क्योंकि उसमें केवल समर्पण का ही भाव होता है, जबकि ज्ञान और वैराग्य में अहंभाव की प्रचुर संभावना समाविष्ट होती है। भक्ति की पराकाष्ठा के कारण ही नारद को नारायण का हृदय कहा गया है। इस दौरान मोती लाल त्रिपाठी, रामेश्वर द्विवेदी, धर्मेंद्र पांडेय, नर्मदेश्वर दूबे, विश्वजीत पांडेय, शिवानंद पांडेय, सतीश कुमार, विपुल कुमार, शम्भू शरण सिंह, शीतला सिंह, अरुण सिंह आदि उपस्थित थे।