मुगलसराय/चकिया। बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के कर्मियों अधिकारियों का धरना प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार को बिलारीडीह स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना देकर चेतावनी दी गई कि यदि निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं चकिया विद्युत उपकेंद्र के कर्मचारियों ने कार्यालय पर तालाबंदी करके बिजली बिल वसूली के कार्य का बहिष्कार किया। इसके चलते शुक्रवार को बिल जमा करने आए लोग निराश होकर वापस लौट गए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनरतले एसई कार्यालय पर चल रहे धरना में वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार बिजली क्षेत्र का निजीकरण करने में सफल हो गई तो बिजली दर में आश्चर्यजनक बढ़ोत्तरी होगी। वर्तमान में सब्सिडी के कारण उपभोक्ताओं न्यूनतम चार रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ रहा है। निजीकरण के बाद यही दर न्यूनतम 12 रुपये हो जाएगा। वक्ताओं ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में हौसला है तो बीएसएनएल की तर्ज पर निजी क्षेत्र के निवेशकों को आमंत्रित करे। कहा कि बिजली उद्योग का निजीकरण हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। निर्णय लिया गया कि 24 मार्च को सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इस मौके पर आशीष सिंह, सुधीर श्रीवास्तव, प्रवीन कुमार, केपी वर्मा, मेंहदी, घनश्याम सिंह, राजमणि वर्मा, एके. पांडेय, दलसिंगार यादव, हंसराज, दिनेश सिंह, मनोज यादव, विनोद कुमार, अबरार अली, प्रशांत कुमार, सागर ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता सर्वेश पांडेय ने और संचालन आरबी यादव ने की। चकिया संवाददाता के अनुसार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के निजीकरण के विरोध में स्थानीय उपकेंद्र पर कार्यरत कर्मचारी शुक्रवार को कार्य बहिष्कार किया और निजीकरण के विरोध में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण से पावर कारपोरेशन में कार्य कर रहे कर्मचारियों के छटनी का मार्ग प्रशस्त होगा। शुक्रवार को उपखंड अधिकारी गोपाल सिंह के आह्वान पर कर्मचारियों ने कार्यालय पर ताला लगा दिया। जिसके चलते बिजली बिल जमा करने आये दर्जनों उपभोक्ता बिल जमा किये बैरंग वापस लौट गए तथा राजस्व वसूली का कार्य पूरी तरह ठप रहा। इस दौरान शारदा प्रसाद तिवारी, शशिप्रकाश गुप्ता, प्रमोद कुमार, भानू, लालता बिंद, ओमप्रकाश मौजूद रहे।