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किसानों को मानसून का इंतजार

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चंदौली। जनपद में धान की नर्सरी डालने का कार्य धीमी गति से हो रहा है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से किसान चिंतित हैं और मानसून का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों को जिले में बिछी नहरों में पानी छोड़े जाने की इंतजार है। हालांकि किसान नर्सरी डालने की तैयारियां कर चुके हैं। कुछ इलाकों में नलकूपों व निजी संसाधनों के सहारे धान की नर्सरी डाली भी जा चुकी है, लेकिन छोटे किसान अभी भी मानसून पर ही आश्रित हैं। कृषि विभाग का दावा है कि खरीफ के लिए उर्वरक व बीज जिले में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वहीं जहां पानी उपलब्ध है वहां लोगों धान की नर्सरी डालने की तैयारी तेज है।
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जनपद के एक लाख 17 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होना प्रस्तावित है। जून का अंतिम पखवारा चल रहा है और किसान तेजी से खेतों की ओर रुख करता दिख रहा है। अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान मायूस व परेशान जरूर हैं, लेकिन वह अपनी फसल को समय से रोपने के लिए तैयारियों को मूर्त रूप दे चुके हैं। उन्हें सिर्फ खेतों को सिंचित करने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता है। जिन क्षेत्रों में राजकीय व निजी नलकूप, नहरें व माइनर हैं वहां के किसानों ने पानी की व्यवस्था कर धान की नर्सरी डाल रखी है, वहीं टेल पर बसे किसानों को पानी की दरकार है। कृषि का कहना है कि जिले के सभी बीज व उर्वरक केन्द्रों पर बीज व खाद उपलब्ध करा दिया गया है और किसान वहां से खरीदारी भी कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी कमलजीत सिंह ने बताया कि 5611 एमटी डीएपी लक्ष्य के सापेक्ष 4402 एमटी की उपलब्धता बनी हुई है। 20938 एमटी यूरिया के सापेक्ष 9902 एमटी यूरिया की उपलब्धता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया।
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