कार्तिकेय पांडेय राजदरी । चंद्रप्रभा अभयारण्य में राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या में अचानक गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2016 में यहां मोरों की संख्या मात्र 174 थी, लेकिन संरक्षण व अन्य प्रयासों की वजह से यह संख्या 2022 में बढ़कर 686 तक पहुंच गई थी। लेकिन 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 301 रह गई है यानी तीन साल में 385 मोर कम हो गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोरों की संख्या और प्रजनन के आधार पर 2025 में उनकी संख्या 800 से ज्यादा होनी चाहिए थी। ऐसे में शिकार की आशंका जताई जा रही है।
विंध्य पर्वत मालाओं की गोद में बसा चंद्रप्रभा अभयारण्य 96 हजार हेक्टेयर में फैला है। जंगल में गुलदार, तेंदुआ, चिंकारा, घड़रोज, सांभर, भालू, सुअर, बंदर, लंगूर, मगर, भेड़िया, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सियार आदि पशु हैं। हाल के वर्षों में वनों के दोहन के कारण वन्य जीवों के आहार में कमी आई है। शाकाहारी वन्य जीवों के लिए जंगल में फलदार वृक्षों में तेन, पियार, आंवला, बेर आदि की संख्या भी घटी है।
वनांचल में पशु-पक्षियों के बारे में जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ मुकेश ने बताया कि शिकारियों की सक्रियता, जंगलों की लगातार घटती जमीन, और मानवीय हस्तक्षेप इस भारी गिरावट के प्रमुख कारण हैं।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में मोरों की मधुर आवाज यादों में सिमटकर रह जाएगी।
रामनगर आद्यौगिक एसोसिएशन की ओर से विद्यालय को दिया गया डेस्क-बेंच। स्वयं