मुगलसराय। जिले में प्रस्तावित रिंग रोड और निर्माणाधीन रेल फ्रेट कारिडोर योजना के लिए बिना उचित मुआवजा दिए भूमि अधिग्रहण किए जाने के विरोध में किसानों ने शनिवार को आवाज उठाई। उचित मुआवजा की मांग करते हुए किसानों ने शनिवार की सुबह पदयात्रा निकाली। प्रभावित इलाके का भ्रमण करने के बाद ताराजीवनपुर स्थित बुढ़िया माई मंदिर प्रांगण में सभा कर प्रशासन को चेताया कहा कि बिना उचित मुआवजा दिए एक इंच भूमि का भी अधिग्रहण नहीं करने दिया जाएगा।
सकलडीहा और नियामताबाद ब्लाक के दर्जनों गांवों के किसान शनिवार की सुबह छह बजे पचफेडवा गांव में एकत्र हुए। किसान संघर्ष मोर्चा के बैनरतले किसान नेता केदार यादव के नेतृत्व में पदयात्रा की शुरूआत की। शासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रेवसा, बनजरिया, धूस, बसरतिया, बसनी,धमिना, कोरी होते हुए ताराजीवन चौराहा स्थित बुढ़िया माई मंदिर परिसर में पहुंच कर सभा की। सभा में सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार नहरों में पानी, खेतों के लिए खाद और लोगों को पर्याप्त बिजली देने में नाकाम है। धान की खरीद नहीं हुई। किसानों को ऋण माफी का वादा कर छलावा साबित हो रहा है। बावजूद इसके किसानों की जमीन जबरदस्ती लेने का प्रयास किया जा रहा है।
अध्यक्षता करते हुए किसान नेता केदार यादव ने कहां की हम अपनी जमीन बिना उचित मुआवजा के नहीं देंगे इसके लिए किसानों के सहयोग की अपेक्षा है। इस दौरान सछास के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सिंह काका, पूर्व ब्लाक प्रमुख बाबूलाल यादव, जिला पंचायत सदस्य सुदामा यादव ,डॉ स्वामीनाथ, चंद्रशेखर सिंह, रमेश तिवारी, कौशल मिश्रा चकरू यादव , इस्तखार भाई, श्याम नारायण यादव, बसपा नेता वसीम अहमद ,सरवर अली, अंकित यादव, विक्की प्रधान, निरंजन यादव, राजकुमार पप्पू, उमाशंकर ड्राइवर ,यशवंत चौहान, दशरथ प्रधान, मटकु यादव, बनवारी प्रधान, कमलेश प्रधान ,रामविलास प्रधान ,कपिल मास्टर, बनारसी यादव ,कैलाश भगत, कृष्णकांत, मक्खन यादव सुरेंद्र यादव रहे।
मशाल जुलूस आज
मुगलसराय। रिंग रोड को लेकर किसानों की लेडुआ गांव के शिवाला में रविवार की शाम तीन बजे से बैठक होगी। इसमें आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। इसके बाद लेडुआ से मशाल जुलूस निकलेगा। इसकी सूचना किसान नेता केदार यादव ने दी है।
मुगलसराय। रेल फ्रेट कारीडोर और रिंग रोड के लिए प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी जमीन का मुआवजा जिला प्रशासन की ओर से एक से सवा लाख रुपये प्रति बिस्वा दिया जा रहा हैं। जबकि उन्हेें वर्तमान में चल रहे बाजार की दर से चार गुना प्रति बिस्वा के हिसाब से मुआवजा मिलनी चाहिए। किसानों का कहना है कि वर्तमान में चार लाख रुपयेे बाजार मूल्य है। इसका चार गुना कम से कम 11 से 12 लाख रुपये प्रति बिस्वा के हिसाब से उन्हें मुआवजा मिलनी चाहिए।