भूमि व जल संरक्षण समिति की बैठक गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सीडीओ डा. एके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई। जिसमें जनपद के छह ब्लाकों में चयनित 307 हेक्टेयर जमीनों पर जल संरक्षण कार्यक्रम के तहत भूमि सुधार कार्य कराने पर मंजूरी मिली। जिसमें लगभग 83 लाख रुपये धनराशि खर्च होगी। इससे खाली पड़ी बेकार जमीनों को उपजाऊ बनाने और कटान प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की योजना है।
भूमि व जल संरक्षण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत किसानों के बंजर खेतों में जल संरक्षण की रणनीति बनाई गई है। इसके लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में जिले में कुल 307 हेक्टेयर भूमि का लक्ष्य रखा गया है। बंजर भूमि में मेढ़बंदी कर बारिश के पानी को संचित किया जाएगा। इससे मिट्टी में नमी की मात्रा बढ़ने से उर्वरा शक्ति का विकास होगा। वहीं पोषक तत्वों की मात्रा में भी इजाफा होगा। बताया कि जनपद के चकिया के भीखमपुर, रघुनाथपुर, पीतपुर, प्रभुनारायनपुर, नौगढ़ के परसिया, चहनिया के पुरा विजई गंगापुर, बरहनी के टेकारी, गौसैसीपुर और धानापुर के महुंजी को चयनित किया गया है। बताया कि कार्य को पूरा करने के बाद भूमि की जीओ टैगिंग के साथ ही जीपीएस लोकेशन को भी आनलाइन अपलोड करने का कार्य किया जाता है। इससे किसी भी समय कराए गए कार्य के बाबत विस्तृत जानकारी हासिल की जाती है। इसके अलावा एनएमएसए योजना के तहत जिले में 220 किसानों की 142 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। 1 करोड़ 44 लाख की लागत से किसानों की भूमि का समतलीकरण किया जाएगा। सीडीओ ने कहा कि योजना के लिए शासन से स्वीकृत होने वाली धनराशि का पारदर्शिता के साथ उपयोग किया जाना चाहिए। किसानों को हर हाल में इसका लाभ मिले। इसलिए विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ईमानदारी के सात दायित्वों का निर्वहन करें। बैठक में जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार भारती, एक्सईएन मूसाखाड़ जेपी वर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी दिनेश सिंह उपस्थित रहे।