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असीमित ज्ञान का केंद्र हैं पुस्तकें - मुंसिफ मजिस्ट्रेट

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चकिया। पुस्तकें असीमित ज्ञान का केंद्र हैं। पुस्तकों से मानव को ज्ञान एवं उनकी जिज्ञासा शांत करने में मदद मिलती है। पुस्तकों का संरक्षण पुस्तकालय के जरिए किया जाता है। इसलिए पुस्तकालयों का संरक्षण एवं संवर्धन जरूरी है। ये बातें स्थानीय श्रीआदित्य नारायण पुस्तकालय परिसर में पुस्तकालय प्रबंध समिति के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सिविल जज जूनियर डिविजन नितेश सिन्हा ने कहीं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय के विस्तार के साथ ही पुस्तकों के संरक्षण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
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उपजिलाधिकारी रामसंजीवन मौर्य ने कहा कि पुस्तकालय के संरक्षण के साथ-साथ पुस्तकालय भवन में बने कमरों के संरक्षण का प्रयास होना चाहिए। इस अवसर पर आदित्य पुस्तकालय के वरिष्ठ चुनाव अधिकारी रामकृत ने निर्वाचित पदाधिकारियों अध्यक्ष लालबहादुर मिश्र, महामंत्री पद पर शशिकांत, उपाध्यक्ष पर अवधेश नारायण सिंह, उपमंत्री तेजवंत नारायण बहुगुणा, कोषाध्यक्ष कर्मवीर सिंह चौहान, आडिटर विंदेश्वरी द्विवेदी को पूर्व में ही निर्विरोध निर्वाचित कर दिया गया है। इसके अलावा कार्यकारिणी के लिए गौरव श्रीवास्तव, राजदेव सिंह, रणजीत सिंह, जयप्रकाश सिंह, विजय बहादुर सिंह, शमशेर सिंह, रविन्द्र कुमार पांडेय, राजेश तिवारी और शिवपूजन सिंह को पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर तहसीलदार फूलचंद्र यादव, पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष ओंकारनाथ, बार के अध्यक्ष विजय यादव, अवधेश नारायण तिवारी, मणिशंकर पांडेय, शमशेर सिंह, भईयालाल सिंह, उमाशंकर सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे। संचालन नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने किया।
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