पीडीडीयू नगर के लोको कालोनी के समीप रेलवे ट्रैक पार करते लोग। संवाद
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पीडीडीयू नगर। रेल लाइन से चलकर आने-जाने में आए दिन हादसे हो रहे हैं लेकिन लोग अपनी आदत में सुधार नहीं कर रहे हैं। रेलवे की सख्ती और कार्रवाई के बावजूद लोग सुरक्षित रास्ते का इस्तेमाल करने के बजाय पटरियों से ही आते-जाते हैं। बीते एक साल में रेलवे ट्रैक पार करते समय 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, रेल प्रशासन ने आठ महीने में 2143 लोगों का चालान किया है। इसके बाद भी रोज 400 से ज्यादा लोग रेलवे ट्रैक से आते-जाते हैं।
पीडीडीयू नगर में एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड है। ज्यादातर कॉलोनियां और मोहल्ले रेलवे लाइन के किनारे बसे हैं। पीडीडीयू जंक्शन से हावड़ा की ओर पटना और गया रूट की दो लाइनें निकली हैं। प्रयागराज और वाराणसी के लिए अलग-अलग लाइनें हैं। इसके साथ ही वाराणसी से मिर्जापुर जाने वाली रेलवे लाइन भी जिले से गुजरती है।
सुरक्षा के लिए रेलवे की ओर से ट्रैक के किनारे बाड़ लगाई जा रही है। वहीं, रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक, ओवरब्रिज और अंडरपास भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद लोग रेल लाइन से आने-जाने की आदत नहीं छोड़ रहे हैं। ट्रैक पार करने के दौरान लोग ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं और उनकी जान चली जाती है। एक साल में 20 से ज्यादा लोगों की मौत रेलवे लाइन पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से हो चुकी है। रेलवे ट्रैक समेत पूरे रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत दंडनीय है। आरपीएफ और रेल संरक्षा विभाग की ओर से लोगों को जागरूक किया जाता है, लेकिन इसका असर नजर नहीं आ रहा है। संवाद
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कोट
रेलवे यात्रियों और आम लोगों से किसी भी परिस्थिति में रेलवे ट्रैक पार न करने और एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए केवल ऊपरी पैदल पुल अथवा रेल प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करने की अपील करता है। थोड़ी सी जल्दबाजी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। - विश्वनाथ, मंडल जनसंपर्क अधिकारी, पीडीडीयू मंडल
पीडीडीयू नगर के लोको कालोनी के समीप रेलवे ट्रैक पार करते लोग। संवाद- फोटो : credit