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रामहिं केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जान निहारा

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कंदवा । रामहि केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जान निहारा। भगवान को प्रेम सर्वाधिक प्रिय है। प्रेम से अर्पित किए हुए पत्ते व प्रेम से चढ़ाए गए पुष्प भगवान को सहज ही स्वीकार हैं। ये बातें स्थानीय गांव स्थित शिव मंदिर पर तीन दिवसीय श्रीराम चरित मानस कथा के दूसरे दिन शनिवार को वाराणसी से पधारे व्यख्यान वाचस्पति डाक्टर बृजेश मणि पांडेय ने भक्तिमति शबरी के जीवन पर प्रवचन करते हुए कही।
कहा कि भगवान साधन-साध्य नहीं हैं। वे केवल प्रेम हैं। उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि भक्तों के दिल का प्रेम बंधन ही भगवान को प्रेमपाश को बांधने में सक्षम है। लोगों को शांति के लिए शबरी के जीवन चरित्र को अपने में उतारने की जरूरत है।कहा कि अगर मन में निश्चल प्रेम नहीं है तो हमें राम प्राप्त नहीं होंगे ।अगर राम को प्राप्त करना है तो प्रेम को आधार बनाना होगा । सत्संग कि व्यख्या करते हुए कहा कि सत्संग का प्रभाव मानव जीवन की दिशा ही बदल देता है। संयम, धैर्य और शिष्टाचार सत्संग से मिलते हैं। सदाचारी जीवन मानव की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।इस दौरान वेदप्रकाश राय, अच्युतानंद त्रिपाठी, कमलेश राय, राजेश राय, बलराम पाठक, नथुनी सिंह, मोहन राय मौजूद रहे।
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सकलडीहा। मानव कल्याण के लिए कोई कार्य बड़ा या छोटा नहीं होता। अगर मनुष्य बड़े से बड़े कार्य को छोटा बन कर करता है तो निश्चित रूप से समाज उसे आदर व सम्मान देगा। रामभक्त हनुमान ने भी अपने जीवन के जितने बड़े कार्य किए सूक्ष्म रूप धारण कर ही किए। तभी हम उन्हें आज भी पूजते हैं। हनुमान का चरित्र मानव मात्र के लिए आदर्श है। ये बातें आजमगढ़ से पधारे बाल व्यास रामाश्रय रामायणी जी ने तुलसी आश्रम रेलवे स्टेशन परिसर में तुलसी स्मारक सेवा समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन शनिवार को श्रोताओं पर भक्ति की रस वर्षा करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि हनुमान ही एक मात्र ऐसे देवता हैं जो बल , बुद्धि व विद्या तीनों प्रदान करते हैं। कलियुग में हनुमान की भक्ति से ही मानव का कल्याण होने वाला है। कहा कि प्रभु राम धरती पर जितने भी लक्ष्य लेकर पृथ्वी पर आए उसे हनुमान ने ही पूरा किया। भगवान राम के हृदय में भाई भरत , जानकी , लक्ष्मण , सुग्रीव एवं विभीषण बसते थे। परन्तु इन सबकी रक्षा हनुमान ने किया। प्रभु राम ने हनुमान से कुछ मांगने की इच्छा पूछी तो उन्होंने सिर्फ दोनों चरण कमल मांगा । कथा श्रवण करने वालों में अकलू पाठक, शशिनाथ शुक्ल, दिनेश सिंह, शेषनाथ तिवारी, श्यामनारायण यादव, कांता सिंह, अंगद प्रजापति, जियुत राम, अरविंद गुप्ता, रामनिहोर शर्मा शामिल रहे ।
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