क्षेत्र के गंगा-जमुनी तहजीब के प्रतीक बाबा लतीफशाह के मेले की शुरूआत शुक्रवार को परंपरागत ढंग से हुई। बाबा की मजार पर जियारत, चादरपोशी, दुआख्वानी करने के लिए बिहार के साथ चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर सहित पूरे पूर्वांचल से जायरीन जुटे। बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद लोगों ने समीप में स्थित बाबा बनवारी दास के समाधि पर दर्शन पूजन किया। इस मौके पर भजन कीर्तन भी हुआ। दुआख्वानी के बाद लोगों ने मजार के बाहर पिकनिक मनाया। वहीं मेले का खूब आनंद उठाया। मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस के साथ पीएसी के जवान मुस्तैद रहे।
क्षेत्र के प्रीतपुर में स्थित कर्मनाशा नदी के कछार पर कौमी एकता के मिशाल बाबा लतीफशाह की मजार, सैय्यद शाह अजमेरी की मजार और बनवारी दास का मंदिर हैं। यह हिंदू-मुस्लिम के लिए गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है। लतीफशाह में बारहो मास मुस्लिम बंधु जियारत, चादरपोशी और दुआ-ख्वानी करने के लिए आते हैं। वहीं लतीफशाह बंधे के नीचे पिकनिक भी मनाते हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार तीज के तीसरे दिन ऐतिहासिक मेला लतीफशाह का व्यापक स्तर पर आयोजन किया जाता हैं। यहां हजारों हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ बाबा के मजार पर चादरपोशी करते हैं। शुक्रवार को मेले के अवसर पर बाबा के मजार पर जायरीनों ने चादरपोशी की तथा तबर्रूख चढ़ाकर मन्नतें मांगी। इस अवसर पर जायरीनों ने मजार पर दुआख्वानी की। वहीं मजार के पास ही में स्थित बाबा बनवारी दास की समाधि पर भी श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन का आयोजन किया। मेले के दौरान लतीफशाह की मजार परिसर के अलावा कर्मनाशा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित बाबा सैयद शाह अजमेरी की मजार पर भी जायरीन उमड़े रहे। मेला पश्चिमी छोर पर भी लगा। मेले में चाट-पकौड़ी, गुड़हिया जलेबी, बिसातबाने, घरेलू सामग्री, खिलौने, गुब्बारों की दुकानों पर श्रद्धालुओं ने खरीददारी की तथा खेल तमासे का आनंद लिया। श्रद्धालुओं के सुरक्षा की दृष्टि से उपजिलाधिकारी दीप्तिदेव यादव, सीओ कुंवर प्रभात सिंह, चकिया कोतवाल अश्वनी चतुर्वेदी सहित जनपद के कई थानों की पुलिस और पीएसी के जवान सक्रिय रहे।