नौगढ़। जिलेे के नक्सल क्षेत्र और बिहार बार्डर से सटे गांवों में नक्सलियों की आहट के बाद पुलिस और सीआरपीएफ चौकन्ना हो गई है। शुक्रवार को दूसरे दिन भी सीआरपीएफ 148 बटालियन के कमांडेंट राजीव कुमार चौधरी के नेतृत्व में जवानों ने जंगल में कांबिंग की। साथ ही स्थानीय पुलिस भी जेल से छूटे नक्सलियों और उनके रिश्तेदारों पर पैनी नजर रखे हुए है।
नक्सल क्षेत्र में नक्सलियों के देखे जाने की सूचना पर गुरुवार को एडिशनल एसपी नक्सल वीरेंद्र कुमार यादव ने कांबिंग की थी। वहीं शुक्रवार को सीआरपीएफ 148 बटालियन के कमांडेंट राजीव कुमार चौधरी ने चार कंपनी सुरक्षा बल जवानों के साथ जंगलों में कांबिंग अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि सोनभद्र के सोनबरसा गांव से 41 की संख्या में नक्सलियों का समूह सरहद पर सटे गांव से गुजरा तो रास्ते में मिलने वाले राहगीरों को पीटा भी जिसकी सूचना मिलने पर गुरुवार को एडिशनल एसपी नक्सल वीरेंद्र कुमार यादव ने सुरक्षा बलों के साथ कांबिंग की। शुक्रवार को भी सुबह से सोनभद्र और चंदौली के जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी है।
बता दें कि 15 वर्ष बाद एक बार फिर नक्सलियों की उपस्थिति को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार और झारखंड तथा यूपी के मिर्जापुर और सोनभद्र जिले से होकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा नक्सलियों के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। वर्ष 2004 में हिनुउत घाट में विस्फोट के बाद प्रशासन के सख्त और कड़े इंतजाम ने उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया और शरण दाताओं को युद्ध स्तर पर भेजने की कार्रवाई हुई। चंदौली के जंगलों में सुरक्षा बल के जवानों ने पैदल चल कर कांबिंग और गश्त का अभियान जारी है।