सकलडीहा। माता पार्वती के मन में शंका उत्पन्न हुई कि भगवान भोले शंकर के गले में मुंडमाला क्यों है और उन्होंने इसे कब धारण किया। उन्होंने इसके बारे में भगवान शिव से पूछा तो पहले तो उन्होंने मना कर दिया पर माता पार्वती नहीं मानी तो शंकर जी ने बताया कि हे पार्वती जितनी बार तुम्हारा जन्म हुआ उतने ही मुंड मैंने धारण कर लिए। इस पर मां पार्वती बोलीं कि मेरा शरीर नाशवान है और मृत्यु को प्राप्त होता है परंतु आप अमर हैं, इसका कारण क्या है। भगवान शिव ने कहा कि ऐसा अमरकथा के कारण हैं।
उक्त बातें प्रयागराज से पधारी कथा मंदाकिनी राधा ने शुक्रवार को तुलसी स्मारक सेवा समिति की ओर से तुलसी आश्रम रेलवे स्टेशन पर आयोजित 60 वीं रामचरित मानस कथा के दौरान कहीं। कथा आगे बढ़ाते हुए कहा कि ऐसा सुनकर माता पार्वती के मन में भी अमरत्व प्राप्त कर लेने की इच्छा जागृत हो उठी और वह भगवान शिव से अमरकथा सुनाने का आग्रह करने लगीं। जब भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनानी शुरू की तो कहा कि कथा के दौरान बीच-बीच मे आप ओंकार शब्द बोलती रहेंगी। इसके बाद भगवान शिव ने कथा सुनानी आरंभ की लेकिन कथा के बीच में ही माता पार्वती को नींद आ गई। वहां मौजूद तोते का बच्चा पूरी कथा के बीच ओंकार शब्द बोलता रहा।
कथा समापन के बाद जब माता पार्वती की नींद खुली तो उन्होंने भगवान शिव से कथा सुनाने को कहा। इस पर भगवान शिव ने कहा कि अगर आपने कथा नहीं सुनी, तो फिर ओंकार शब्द किसने बोला। तब भगवान शिव ने तोते के बच्चे को देखा, तो वे समझ गए कि इसी तोते के बच्चे ने कथा सुनी व ओंकार शब्द बोला है। कथावाचक ने कहा कि कथा का श्रवण हमें पूरे मनोयोग से करना चाहिए ताकि कथा श्रवण का लाभ उस तोते जैसा मिल सके। कथा में जीवन का सार है जिसको जीवन में उतारकर जन्म-मरण से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दौरान शशिनाथ शुक्ल, दिनेश सिंह, अकलू पाठक, कांता सिंह, शेषनाथ तिवारी, सेनापति मौर्या, जीउत राम मौजूद रहे।