चकिया ब्लाक के पिपरिया गांव में जिंदा लोगों को कागज में मृत घोषित करने के मामले में जिलाधिकारी हेमंत कुमार ने मंगलवार को सेक्रेटरी अजय कुमार चौरसिया को निलंबित कर दिया। पंद्रह सौ रुपये नहीं देने पर ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने जिन 35 विधवा और वृद्धा पेंशनधारकों को मृत में घोषित कर दिया था उनमें 13 लोग जांच टीम के सत्यापन में जिंदा मिले। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने यह कार्रवाई की। अमर उजाला ने अपने पिछले अंक में इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
पिपरिया गांव में पंद्रह सौ रुपये नहीं देने पर सेक्रेटरी व ग्राम प्रधान ने मिलकर गांव के 35 लोगों को कागज पर मृत घोषित कर दिया सेक्रेटरी की रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण विभाग द्वारा सभी लोगों की पेंशन रोक दी गई थी। पेंशन नहीं मिलने से परेशान लोगों ने समाज कल्याण विभाग में शिकायत की तो पता चला कि सेक्रेटरी ने विभाग को जो रिपोर्ट भेजी है उसके अनुसार वह लोग मर चुके हैं। यह सुनकर सभी लोग भौचक रह गए और जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपने जीवित होने का प्रमाण दिया। इस मामले में पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह ने ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया था। वहीं जिलाधिकारी के निर्देश पर रविवार को समाज कल्याण अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला पूर्ति ने गांव में जाकर भौतिक सत्यापन किया, जिसमें मृत घोषित किए गए 35 लोगों में से 13 लोग जांच समिति के सामने उपस्थित हुए। जांच टीम की आख्या पर जिलाधिकारी हेमंत कुमार ने पिपरिया गांव के सेक्रेटरी अजय कुमार चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं जिंदा लोगों की पेंशन बहाल करने हेतु शासन से पत्राचार करने का निर्देश संबंधित अधिकारी को दिया।े