स्थानीय थाना क्षेत्र के भैसही गांव में प्राथमिक विद्यालय के पीछे बीडीसी के 178 मतपत्र फेंके मिले। मतपत्रों से बच्चे खेल रहे थे। 17 अक्तूबर को हुए पंचायत चुनाव के बाद सोमवार की शाम को इस तरह बगैर प्रयोग के मत पत्रों के मिलने की खबर मिलते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।
सूचना पाकर गांव में अधिकारियों की टीम पहुंची और मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार शुरूआती चरण में पीठासीन अधिकारी की लापरवाही मानी जा रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में 17 अक्तूबर को चकिया, चंदौली और बरहनी ब्लाक में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए मतदान हुए।
चकिया ब्लाक में चुनाव के दौरान जमकर हिंसा भी हुई थी। सोमवार की शाम ग्रामीणों ने देखा कि कुछ लड़के मतपत्रों से खेल रहे हैं।
जब उन्होंने ध्यान से देखा तो चकिया ब्लाक के बीडीसी सदस्य पद के प्रत्याशियों के मतपत्र थे। मिलान करने पर सीरियल नंबर 701 से 707, 752 से 760, 764 से 793, 798 से 799 सहित कुल मिलाकर 178 मत पत्र मिले। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना थानाध्यक्ष विश्वज्योति राय को दी।
मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष ने मतपत्रों को कब्जे में ले लिया और बीडीओ चकिया सहित अन्य अधिकारियों को सूचित किया।
मतपत्र फेंके मिलने की सूचना पर बीडीओ गया प्रसाद सिंह, एसडीएम चकिया अनिल कुमार मिश्र, एडीएम शिव कुमार शर्मा, सीडीओ महेन्द्र प्रताप सिंह आदि पहुंचे और जांच पड़ताल शुरू की है।
एसडीएम अनिल कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया पीठासीन अधिकारी की लापरवाही नजर आ रही है। फेंके गए मतपत्र बैलेट बाक्स में नहीं डाले गए हैं।
इसकी जांच की जाएगी और पीठासीन अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। भैसही गांव में प्राथमिक विद्यालय पर 17 को मतदान के अगले दिन ही ग्रामीणों को सादा मतपत्र मिल गया था और धीरे धीरे पूरे गांव में यह बात फैल भी गई थी लेकिन सोमवार को इसका खुलासा हुआ।
ग्रामीणों ने चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को भी इसकी सूचना दी लेकिन चुनाव खत्म होने की वजह से प्रत्याशियों ने भी इसे हल्के में लिया। सोमवार को जब कुछ लोगों की नजर पड़ी और अधिकारियों तक बात पहुंची तब मामले का खुलासा हुआ।