पीडीडीयू नगर। आरपीएफ, बचपन बचाओ आंदोलन, चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम ने ट्रेन से गुजरात में नट बोल्ट बनाने वाली कंपनी में काम कराने किशोरों को ले जा रहे सात लोगों को पकड़ा। इनकी चंगुल से 17 किशोर मुक्त कराए गए। बृहस्पतिवार को अलग-अलग ट्रेनों से 17 किशोरों को मुक्त कराया गया। इन्हें चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया। सात लोगों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के हवाले किया गया।
आरपीएफ पीडीडीयू पोस्ट के निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत ने बताया कि जंक्शन पर ऑपरेशन आहट के तहत चलाए गए अभियान में सुबह अप 15668 गांधी धाम एक्सप्रेस से आठ किशोरों को उतारा गया। उन्हें मजदूरी कराने ले जा रहे चार ट्रैफिकर अजय कुमार निवासी कोहिला, थाना डगरूआ, जिला पूर्णिया बिहार, दिलखुश कुमार निवासी महमादगंज थाना छातापुर सुपौल बिहार, प्रिंस कुमार निवासी वार्ड संख्या 13 महमादगंज छातापुर, सुपौल और अलीमुद्दीन निवासी तिनकोनिया जोगीघोपा, बोगाईगांव आसाम को गिरफ्तार किया गया। इसके कुछ देर बाद ही अप सीमांचल एक्सप्रेस से नौ किशोर मुक्त कराए गए। इन्हें ले जाने वाले तीन लोग मोहम्मद मुश्ताक डफाली निवासी लखना, पूर्णिया बिहार, अजय हंसदा निवासी मसूरिया, पूर्णिया बिहार और मोहम्मद शाहिद निवासी बगडहरा जोकीहाट अररिया बिहार को गिरफ्तार किया गया। मुक्त कराए गए किशोरों में 11 पूर्णिया, तीन अररिया, एक सुपौल, एक रायबरेली (यूपी), एक गोलपारा आसाम के हैं। पकड़े गए लोगों ने बताया कि किशोरों के माता-पिता को रुपयों का लालच देकर किशोरों को गांधी धाम गुजरात और दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर सिलाई एवं नट बोल्ट बनाने वाली कंपनी में प्रतिदिन 12 घंटे कार्य कराने के लिए ले जा रहे थे। इन सबको काम के बदले आठ से नौ हजार रुपये प्रति माह दिया जाता है।