नियामताबाद। भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से रामनगर के पास गंगा नदी के किनारे बनाए गए बंदरगाह के विस्तारीकरण का ग्रामीणों ने मंगलवार को विरोध किया। अधिकारियों को समझाने के बाद भी ग्रामीण नहीं माने वे पुनर्वास की व्यवस्था करने के बाद ही जमीन अधिग्रहण की मांग पर अड़े रहे।
भारतीय जल मार्ग प्राधिकरण की ओर से रामनगर के पास गंगा नदी के किनारे बंदरगाह बनाया गया है। इसका विस्तार चंदौली जिले की मुगलसराय तहसील के मिल्कीपुर, ताहिरपुर तथा मिर्जापुर जनपद की चुनार तहसील के रसूलागंज व छोटा मिर्जापुर तक होना है। इसे लेकर मंगलवार को चुनार के तहसीलदार ओमप्रकाश पांडेय की अध्यक्षता में रसूलागंज गांव में बंदरगाह के अधिकारियों व ग्रामीणों की बैठक चल रही थी। इसीबीच ग्रामीण अधिग्रहण किए जाने वाली जमीन के पूर्व अपने पुनर्वास की व्यवस्था की मांग करने लगे ग्रामीणों ने कहा कि जो जमीन बंदरगाह के विस्तार के लिए अधिग्रहित की जा रही है। इसपर उनका घर, मकान आदि बना हुआ है। जिसे सरकार उजाड़ना चाह रही है। इसे ग्रामीण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। मांग किया कि अगर ग्रामीणों को विस्थापित करना है तो सबसे पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था सरकार करें। यदि सरकार पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करेगी तो किसी भी कीमत पर ग्रामीण अपनी जमीन बंदरगाह के विस्तारीकरण के लिए नहीं देंगे। साथ ही ग्रामीणों ने बैठक में ही हो हल्ला मचाना शुरू कर दिया। इस बाबत चुनार तहसीलदार ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि बैठक बेनतीजा रही। ग्रामीणों की मांग पर भी विचार करके आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान बंदरगाह परियोजना के जगदीश लाल, मिल्कीपुर ग्राम प्रधान भाईराम साहनी, प्रमोद सिंह, लाल बहादुर, किशोरी, संजय, राजू, शंकर, लक्ष्मण, सुनील, मुन्नी देवी, मीरा, शकुंतला, मंजू, लीला देवी रहे।