पीडीडीयू नगर। गेहूं की कटाई-मड़ाई के बाद अब किसान खरीफ की फसल की तैयारी में जुट गए है। धान की नर्सरी डालने के लिए खेतों की जुताई का काम शुरू हो गया है। लेकिन अब तक सिंचाई विभाग नहरों की सफाई तक नहीं करा सका है। अधिकतर नहरों में झाड़ झंखाड़ है। इससे इसमें पानी छोड़े जाने पर भी टेल तक पानी पहुंचाना मुश्किल है। तालाबों को भरने को लिए 25 से 27 मई तक नहरों में पानी छोड़ा गया लेकिन गंदगी की वजह से टेल तक पानी नहीं पहुंचा। ऐसे में धान की नर्सरी के लिए पानी कैसे मिलेगा।
धान के कटोरा के नाम से प्रसिद्ध चंदौली जिले में कृषि मुख्य व्यवसाय है। वैसे तो खेतों की सिंचाई के लिए यहां नहरों का जाल बिछा है लेकिन देख भाल के अभाव में नहरों की हालत दयनीय है। जिले में खेतों की सिंचाई के लिए छोटी-बड़ी कुल 370 नहरें हैं। इनमें चंद्रप्रभा डिविजन से 192, मूसाखांड से 115 और लघु डाल से 69 नहरों का संचालन किया जाता है। इन नहरों से जिले की कुल 12219 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। खेतों की सिंचाई के लिए पानी का बंदोबस्त मुख्यरूप से नरायनपुर व भुपौली पंप कैनाल और चंद्रप्रभा डैम में एकत्र पानी से किया जाता है। इसके अलावा मूसाखांड बांध व कर्मनाशा नदी पर बने लिफ्ट कैनालों से भी पानी लेकर सिंचाई की जाती है। जिले में टेल के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाना सिंचाई विभाग के लिए हमेशा चुनौती बना रहता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार टेल के ऐसे 198 खेत चिह्नित किए गए हैं। इन खेतों तक पानी पहुंचाने में विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। पिछले वर्षों में विभाग ने सिर्फ सर्दी के मौसम में नहरों की सफाई कराने का निर्णय लिया है। इस तरह पिछले वर्ष अक्तूबर नवंबर में नहरों की सफाई हो गई है और अब फिर से बारिश के बाद नहरों की सफाई होगी लेकिन यदि जमीनी हकीकत देखे तो अधिकतर नहरें गंदगी से पटी है। कंदवा ककरैत माइनर नहरों की दुर्दशा बंया कर रहा है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार चंद्रप्रभा बांघ में अभी इतना ही पानी बचा है जिससे केवल एक सप्ताह तक सिंचाई की जा सकती है। धान की फसल के पीक आवर में यदि बारिश नहीं होती है तो इससे जुड़े खेतों की सिंचाई में समस्या होगी।
इनसेट-
दो दिन चली हैं नहरें
पशुओं की प्यास बुझाने के साथ लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए जिले में कुल 89 तालाबों व पोखरों का चयन किया गया है। इन पोखरों व तालाबों में पानी भरने के लिए विभाग ने 25 से 27 मई तक नहरों को चलाया है। अब इन तालाबों व पोखरों में पर्याप्त पानी हो गया है।
कोट.......
खेतों की सिंचाई के लिए किसानों की मांग पर उन्हें समय से पानी दिया जाएगा। शीत ऋतु में लगभग सभी नहरों के क्षतिग्रस्त तटबंधों के मरम्मत का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। बावजूद इसके कहीं से शिकायत मिलने पर क्षतिग्रस्त नहरों के तटबंध बनवा दिए जाएंगे। टेल के खेतों तक भरपूर पानी पहुंचाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। जेपी वर्मा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।