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मौनी अमावस्या: लाखों भक्तों ने पश्चिमवाहनि गंगा में डुबकी

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चहनियां। मौनी और सोमवती अमावस्या पर बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा में चार लाख से अधिक आस्थावानों ने पुण्य की डुबकी लगाई। आधी रात के बाद से ही स्नान का सिलसिला शुरू हुआ तो सोमवार को देर शाम तक चलता रहा। श्रद्धालुओं का रेला उमड़ने से बलुआ घाट में मिनी कुंभ जैसा नजारा रहा। अनुमान से अधिक भीड़ जुटने से व्यवस्थाएं ध्वस्त दिखीं। भीड़ को संभालने में पुलिस और प्रशासन को नाकों चने चबाने पड़े। लोगों ने स्नान-दान के बाद मेले में घरेलू सामान खरीदारी की। साथ ही व्यंजनों का लुत्फ उठाने के साथ झूले-चर्खी का आनंद लिया। इस वर्ष कुंभ के साथ सोमवार को मौनी अमावस्या पड़ने से इसकी महत्ता बढ़ गई थी। इसको देखते हुए यह माना जा रहा था गत वर्ष की अपेक्षा इस बार भीड़ ज्यादा जुटेगी लेकिन चार लाख का आंकड़ा पार कर जाएगा, ऐसा अनुमान प्रशासन को नहीं था। पिछले एक माह से यहां मेले की तैयारियां चल रही थीं। पांच दिन पहले डीएम नवनीत सिंह चहल और एसपी संतोष कुमार सिंह ने मेले के तैयारियों की समीक्षा की थी, लेकिन आस्थावानों की भीड़ के चलते सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए। रविवार की शाम से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आधी रात के बाद हर हर महादेव, हर हर गंगे के जयकारे के साथ श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाने में जुट गए। सुबह पांच बजे बलुआ और आस-पास का कोई ऐसा घाट नहीं बचा, जहां तिल रखने की भी जगह हो। पेयजल, चेंजिंग रूम, अस्थायी टायलेट कम पड़ गए। भीड़ को संभालने में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पसीना बहाते रहे। मेले में पूरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा। बावजूद इसके आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा। पूरे भक्ति भाव से लोगों ने स्नान-दान कर पुण्य लाभ कमाया। इसके बाद लोगों ने मेले में खूब खरीदारी की। सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू सामान, ओखली, जांत, मूसल, दउरी, सूप आदि की खरीदारी में लोग मशगूल रहे। बच्चों ने झूले, जादू और सर्कस का आनंद उठाया तो चाट, पकौड़ी और जलेबी की दुकानों में भी खूब भीड़ रही। वहीं, सीडीओ डॉ. एके श्रीवास्तव, सकलडीहा एसडीएम आशीष कुमार और क्षेत्राधिकारी त्रिपुरारी पांडेय दिन भर मेले की व्यवस्था संभालने में डटे रहे।
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