शहरी गरीबों के लिए कांशीराम आवासीय योजना बंद होने की घोषणा हो चुकी है। जबकि अभी इस योजना के तहत बने 144 आवासों का आवंटन होना बाकी है। ऐसे में खाली आवासों के आवंटन की आस लगाने वाले लोगों में असमंजस की स्थिति है। क्योंकि अब नए आवास नहीं बनेंगे।
वर्तमान में जिले में मुगलसराय और चंदौली में 1644 आवास बनाए गए हैं। इसमें 1500 लोगों को आवास का आवंटन हो चुका है जबकि 144 लोगों के आवंटन की प्रक्रिया अधूरी है। मायावती ने अपने शासन काल में शहरी गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए कांशीराम शहरी आवासीय योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत प्रति वर्ष शहरी इलाकों में 15 सौ आवास बनाए जाने थे। जिले के मुगलसराय नगर पालिका क्षेत्र और चंदौली नगर पंचायत में पहले चरण में आवास का निर्माण कराए गए। मुगलसराय के ओड़वार चतुर्भुजपुर, गोधना बाईपास और गोधना गांव सहित तीन स्थानों पर पहले चरण में 828 आवास बनाए गए जबकि और चंदौली के वार्ड नंबर पांच उसड़ा 672 आवास बनाए गए। सैयदराजा और चकिया नगर पंचायत में भूमि न मिलने की वजह से आवास नहीं बन सके। दूसरे चरण में भी भूमि की तलाश की गई लेकिन भूमि नहीं मिली, इससे आवास नहीं बने।
तीसरे वर्ष चंदौली में 144 आवास का और निर्माण किया गया। इस तरह जिले में कुल 1644 आवास बनाए गए। हालांकि तीसरे चरण के आवास में बिजली, पानी की व्यवस्था नहीं है। पहले चरण में बने आवासों के आवंटन तो कर लिया गया लेकिन तीसरे चरण में बने 144 आवासों का आवंटन चुनावी आचार संहिता की वजह से अब तक नहीं हुआ। अब डूडा और तहसील प्रशासन द्वारा आवास आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू है। इस बीच योजना को बंद करने के बाद गरीबों के लिए आवास पाने की रही सही कसर भी दूर हो गई है। वहीं पहले से ही उपेक्षित महसूस कर रहे आवास के लोग योजना बंद होने को लेकर संशय ग्रस्त हैं।