चंदौली। कुपोषण मुक्त अभियान को जिले के अधिकारी पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अधिकारियों के सुस्ती के चलते अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन करने के लिए वेट मशीन तक नहीं खरीदी जा सकीं। प्रधानों और आशा कार्यकर्ता के खाते नहीं खुलने से शासन की योजना खटाई में पड़ती दिख रही है। केवल सदर ब्लाक में योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से हो रहा है। इस पर डीएम ने अफसरों को जमकर फटकार लगाई और सीडीओ को मानीटरिंग करने का निर्देश दिया। नीति आयोग ने चंदौली समेत प्रदेश के आठ जनपदों को आकांक्षात्मक जिले की श्रेणी में रखा है। आयोग ने इन जिलों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत सभी 1836 आंगनबाड़ी केंद्रों पर वेट मशीन खरीदने का फरमान शासन से आया है और बजट भी भेज दिया गया है। इसकी जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों और आशाओं को जिम्मेदारी दी गई है। मानीटरिंग के लिए पंचायती राज व स्वास्थ्य विभाग को लगाया गया है लेकिन अभी तक सदर ब्लाक के कुछ गांवों को छोड़ दें तो कहीं भी ग्राम प्रधान और आशा कार्यकत्रियों के संयुक्त बैंक खाते ही नहीं खोले है। इस लापरवाही की वजह से अभी तक वजन मशीन ही नहीं खरीदी जा सकी। जिला प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्यदायी संस्था को भी नियुक्त कर दिया गया है। 1690 रुपये प्रति मशीन के रेट निर्धारित कर दिया गया है लेकिन खाते न खुलने से मशीनों की खरीद नहीं की जा सकी। गुरुवार को डीएम नवनीत सिंह चहल ने योजना की सुस्त प्रगति पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और सीडीओ को निर्देश दिया कि वह संबंधित विभागों के अधिकारियों की मानिटरिंग करें। लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ शासन को पत्र भेजा जाएगा।