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बाकले मैदान पर छोटे से मंच पूरे भारत के हुए दर्शन

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पीडीडीयू नगर। नगर के बाकले खेल मैदान में अंतर रेलवे सांस्कृतिक राष्ट्रीय (नृत्य) प्रतियोगिता की शुरूआत गुरुवार को हुई। उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर जोन के अपर महाप्रबंधक विद्या भूषण ने दीप प्रज्ज्वलित कर और गुब्बारे आसमान में छोड़ कर की। पहले दिन विभिन्न जोन से आए कलाकारों ने एकल और सामूहिक रूप से भरत नाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी नृत्य के साथ कालबेलिया, समई नृत्य से लोगों का मन मोहा। सुर ताल के बीच कदमों की कलाकारी दिखाई तो दर्शक सुर ताल की लहरों में गोता लगाने लगे। पहले दिन 29 टीमों ने कला का प्रदर्शन किया।
उद्घाटन समारोह में वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 21 जोन व वर्कशाप की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। दो दिवसीय सांस्कृृतिक कार्यक्रम में पूरे देश की झलक दिख रही है। इतने बड़े आयोजन की जिम्मेदारी मंडल को मिलना बड़ी बात है। कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक एकता परिचायक हैं। भाषाई, सांस्कृतिक एकता की कड़ी यह कार्यक्रम बनेगा। प्रतियोगिता में पहले दिन दक्षिण रेलवे, मध्य रेलवे, सीएलडब्लू, ईसीआर, ईस्ट कोस्ट रेलवे, एनएफआर, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण पश्मिच रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, डीएलडब्लू, दक्षिण पूर्व रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आईसीएफ बरेली, पश्चिम मध्यरेलवे, उत्तर मध्य पश्चिम रेलवे के कलाकारों ने एकल और डीएलडब्लू, उत्तर मध्य रेलवे, रेल कोच फैक्टरी, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, ईस्ट कोस्ट रेलवे, सीएलडब्लू, पूर्व रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे ने सामूहिक नृत्य से मन मोहा। निर्णायक मंडल में प्रेमचंद होम्बल, डॉ. विधि नागर, बीएचयू की नृत्य फैकल्टी की प्रमुख डॉ. श्वेता चौधरी रहे। इस मौके पर एसके मिश्र, अनिल कुमार राय, राजन कुमार, केएस पांडेय, अमित कुमार, इंद्रजीत प्रसाद, अनिल कुमार प्रज्ज्वल रहे। संचालन एसके तिवारी ने और कार्यक्रम समन्वयक मंडल कार्मिक अधिकारी सीएस आजाद रहे।
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पीडीडीयू नगर। अंतर रेलवे सांस्कृतिक (नृत्य) प्रतियोगिता में पूर्व मध्य रेलवे स्काउट गाइड ने मुख्य भूमिका निभाई। बात चाहे कलाकारों के स्वागत की हो अथवा उनकी सुरक्षा की या उन्हें गाइड करने की। हर जगह पूर्व मध्य रेलवे स्काउट गाइड संघ ने भागीदारी निभाई। देश के कोने से कलाकारों ने भी स्काउटों की भूमिका को सराहा।

पीडीडीयू नगर। भारत विभिन्न सांस्कृतिक, भाषाओं, धर्मों के लोगों से मिलकर बना है। सांस्कृतिक कड़ी से ही देश एक दूसरे से जूड़ा रह सकता है। इस तरह के कार्यक्रम से विभिन्न धर्म, संस्कृति के लोगों को एक दूसरे को जानने का मौका मिलता है। ये बातें राष्ट्रीय अंतर रेलवे सांस्कृतिक (नृत्य) प्रतियोगिता में शामिल होने आए कलाकारों ने कहीं।
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सीएलडब्लू चितरंजन में ओएस पद पर तैनात और भरत नाट्यम नृत्यांगना मौसुमी साहा ने कहा कि रेलवे संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बड़ा काम कर रहा है। बताया कि वह चार वर्ष की उम्र में नृत्य सीख रही हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जाने से वहां की संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिलता है। 15 कलाकारों की टीम के साथ आई मौसुमी स्वयं भरत नाट्यम प्रस्तुत कर रही हैं जबकि सामूहिक रूप से कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत होगा। मुंबई से अपने पिता कस्तुरी शिंदे के साथ आई नौवीं कक्षा की छात्रा नृत्यांगना कस्तुरी शिंदे मंडल की व्यवस्था और यहां के लोगों के व्यवहार से गदगद दिखी। मुंबई में उत्तर भारतीयों पर हमले और नफरत पर कहा कि आम लोगों में कोई नफरत नहीं है। इस तरह के कार्यक्रमों से ही मेल मिलाप बढ़ेगा और नफरत कम होगा। उनकी टीम सामूहिक रूप से गोवा की पारंपरिक नृत्य समई प्रस्तुत करेगी। अपने पिता दक्षिण रेलवे चेन्नई में टीआई पद पर तैनात गनेश के साथ आई नौवीं की छात्रा श्रीजया वैष्णवी पहली पर पूर्वांचल में आई है। कहा कि यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।



।(बाकले मैदान पर छोटे से मंच पूरे भारत के हुए दर्शन
01. दो दिवसीय राष्ट्रीय रेलवे नृत्य प्रतियोगिता का हुआ आगाज
पहले दिन भरत नाट्यम, कालबेलिया, समई नृत्य ने मन मोहा )
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