फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिनभर निराजल व्रत रख कर शाम को लगाया बखीर का भोग

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रतियों ने दिन भर निराजल रहकर सूर्योपासना की और शाम को चावल, दूध और गुड़ की बखीर तैयार की। चंद्रदर्शन के बाद पूजन के बाद बखीर, पूड़ी आदि का भोग लगाया और जल ग्रहण किया। इसके साथ ही छत्तीस घंटे के उपवास की शुरूआत की। इसके पूर्व व्रतियों ने नदी और सरोवर तटों पर पहुंच कर अर्घ्य के लिए वेदी तैयार की और घाटों की पूजा अर्चना कर दीप दान किया। सरोवरों में तैरते दीपक की टिमटिमाती लौ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
व्रती सुबह से ही पूजन अर्चन की तैयारी में जुट गए। सुबह उठ कर स्नान ध्यान किया और सूर्योपासना शुरू कर दी। दिन भर अस्ताचलगामी और उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पकवान आदि तैयार किए। शाम के वक्त नजदीक के गंगा नदी के साथ सरोवर, तालाबों पर पहुंच कर अर्घ्य के लिए वेदी तैयार की और धूप, दीप, नैवेद्य, सिंदूर से घाट पूजन किया। इसके बाद दीपक जला पत्ते के दोने में रख कर उसे तालाब में प्रवाहित किया गया। इसके बाद घर लौट आए और परंपरागत तरीके से नई ईंट को जोड़ कर चूल्हा तैयार की और आम की लकड़ी और उपले के ईंधन से चावल, गुड़ और दूध की बखीर तैयार की। इसके बाद चंद्रदर्शन कर विधि विधान से छठ मइया की पूजा अर्चना के बाद बखीर का भोग लगाया व जल ग्रहण किया। इसके साथ ही 36 घंटे के उपवास की शुरूआत की। व्रती के भोग लगाने के बाद घर परिवार और आस पड़ोस के लोगों ने बखीर, पूड़ी, रोटी का प्रसाद ग्रहण किया और भगवान सूर्य और छठ मइया के जयकारे लगाए। व्रतियों ने पूरी रात जागकर बखीर वाले चूल्हे पर ही पूरी रात जाग कर आटा, गुड़ का ठेकुआ, पीसे चावल के पकवान तैयार किए। मंगलवार की शाम व्रती सरोवर तटों पर पहुंच कर अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। बुधवार को उदयाचल सूर्य के अर्घ्य के साथ व्रत का समापन किया जाएगा।
विज्ञापन




पीडीडीयू नगर। लोक आस्था के महापर्व डाला छठ की पूर्व संध्या पर सोमवार को बाजार में फलों की दूकान सजी। यहां भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए फलों की खरीरदारी के लिए लोगों की भीड़ रही। नगर सहित पूरे जिले के महत्वपूर्ण बाजारों में दर्जनों स्थानों पर अस्थायी रूप से फलों की दुकानें सजी। यहां दोपहर बाद से देर रात तक खरीदारों का जमावड़ा रहा। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष फलों की कीमत में बढ़ी रही लेकिन आस्थावानों पर इसका असर नहीं हुआ।
डाला छठ पर अस्ताचलगामी सूर्य और उदयाचल भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने का महत्व है। प्रकृति प्रेम के महत्व को दर्शानें वाली लोक आस्था के महापर्व पर भगवान भाष्कर को ऋतु फल और अत्यंत शुद्घता से तैयार पकवानों से अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देनेव् के लिए फलों से भरी टोकरियां व्रतियो के संपन्नता को भी दर्शाता है। इस वजह से भी लोग अधिक से अधिक फलों की खरीददारी करते है। मांग को देखते हुए सोमवार को नगर में जीटी रोड के किनारे फलों की दूकाने सजी। इसी तरह ग्रामीण इलाकों के बाजार में भी जगह-जगह फलों की दूकाने सजी रही। यहां सुबह से देर शाम तक खरीददारों की भीड़ रही। अर्घ्य देने के लिए अमरूद, सेव, नाशपाती, संतरा, मुसम्मी, अनार, केला, नारियल, गन्ने, अन्नानास, अमरख, खीरा, पानी फल सिंघारा की खूब बिक्री रही। मंडी के थोक विक्रेता महेन्द्र सोनकर, लालचंद सोनकर और दूधनाथ सोनकर ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष फलों की कीमत में दस से 15 प्रतिशत इजाफा हुआ है।


कुछ इस प्रकार रहे फलो के दाम ---
केला- 30 से 40 रुपये प्रति दर्जन
केला की घौंद-तीन से चार सौ रुपये
सेव- 80 रुपये किलो
संतरा- 100 रुपये किलो
मोसम्मी- 120 रुपये किलो
नाशपाती- 100 रुपये किलो
मूली-20 रुपये किलो
अमरूद- 100 रुपये किलो
आवलां- 10 रुपये में चार पीस
अंगूर-240 रुपये में दो किलो
नारियल जटा वाली-50 रुपये पीस
नारियल बंद-60 रुपये
शरीफा- 120 रुपये किलो
हल्दी की गांठ- 30 रुपये पीस
अमरख-10 रुपये पीस
कदम-10 से 15 रुपये पीस
अनार-100 रुपये किलो
अन्ननास-30 रुपये पीस
कैथी- 10 रुपये पीस
पानी फल सिंघाड़ा- 25 से 30 रुपये किलो
कंद-साठ रुपये
गन्ना-20 -30 रुपये प्रति पीस



पीडीडीयू नगर। सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ की पूर्व संध्या पर घाटों पर पूजन- अर्चन के बाद दीपदान किए जाने से सरोवर तट दीपों की झिलमिलाहट से जगमगा उठें। वहीं पूजा समितियों की ओर से विद्युत झालरों, ट्यूबलाइटों और हाईमास्ट लाइटों से रोशनी की व्यवस्था की गई है। तालाबों के किनारे पूजा समिति की ओर सल्े लाउडस्पीकर लगाए गए हैं और छठी के गीत बजाए जा रहे हैं। इससे माहौल पूरी तरह भक्ति मय हो गया। नगर के मानसनगर स्थित मानसरोवर तालाब, दामोदरदास पोखरा, मानसरोवर तालाब, सिकटिया तालाब, गोबरिया पोखरा पर व्रतियों के लिए अनेक इंतजाम किए गए है।



शिकारगंज। भारतीय संस्कृति में प्रकृति की विविध स्वरूपों की पूजा की प्रधानता रही है। अग्नि तत्व के प्रतीक, सूर्य तथा जल के अद्भूत सामंजस्य से जुड़े छठ महापर्व में मानव जीवन का विज्ञान भी में निहित है। सनातन धर्म में सभी त्योहार शास्त्र नियंत्रित होते है लेकिन छठ का महापर्व लोक आस्था का महापर्व है।
भारतीय संस्कृति में सूर्य पूजा अर्चना के केन्द्र में हैं, लेकिन डाला छठ ही एक मात्र ऐसा पर्व है जिससे अस्ताचलगामी सूर्य की भी उपासना की जाती है। भारतीय संस्कृति के सभी पर्व और त्यौहार शास्त्र नियंत्रित हैं। जिन्हें मंत्रों और कर्मकाण्ड के जरिये संचालित किया जाता है लेकिन डाला छठ में न कोई मंत्र है न ही कोई शास्त्रीय कर्मकांड। यह महापर्व सिर्फ लोक निर्मित विधि विधानों से ही संचालित होता है। इसलिए इस पर्व को लोक आस्था का महापर्व का महापर्व कहा गया है। यही कारण है कि इस पर्व से परिवार का हर सदस्य सीधे तौर पर जुड़ा दिखता है। डॉ. हौसिला प्रसाद द्विवेदी कहते हैं कि जनजुड़ाव का जो रूप इस पर्व में दिखता है वैसा अन्य पर्वों में कम दिखता है। डॉ. रामकिशोर शर्मा बेहद कहते हैं कि छठ पूजा का लक्ष्य मानव को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना है। वैसे भी भारतीय संस्कृति में सूर्य दर्शन, सूर्य नमस्कार, सूर्य अर्घ्य की परंपरा निहित है।



पीडीडीयू नगर। ग्रामीण क्षेत्रों में भी छठ पूजा की तैयारी पूरी हो चुकी है। सरोवरों के तटों की साफ सफाई के बाद घाटों पर रोशनी की व्यवस्था की गई है। डाला छठ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी की गई।
चकिया संवाददाता के अनुसार छठ पूजा महापर्व के दौरान मां काली पोखरे पर सहायतार्थ शिविरों का आयोजन किया गया हैं। इसके माध्यम से लोगों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। युगांधर सेवा समिति के अध्यक्ष विकाश मध्देशिया ने बताया कि सहातार्थ शिविर का उद्घाटन समाजसेवी भाजपा नेता कैलाश प्रसाद जायसवाल करेंगे। मां काली सेवा समिति सहदुल्लापुर के अध्यक्ष गुरूदेव चैहान ने बताया कि सहायतार्थ शिविर का उद्घाटन चकिया विधायक शारदा प्रसाद करेंगे। वहीं नगर और शिकारगंज क्षेत्र में छठ महापर्व की व्रती महिलाओं ने सोमवार की शाम नजदीकी तालाबों, नदी और बंधियों में पहुंच कर घाटों का पूजन किया। नगर के काली मंदिर पोखरा, सिकंदरपुर पोखरा, शिकारगंज पोखरा, मुजफ्फरपुर स्थित चंद्रप्रभा नदी में, जागेश्वरनाथ मंदिर, चन्द्रावती नाला पथरहवां, गरला, लतीफशाह बांध, मूसाखांड़ बांध सहित तमाम स्थलों पर महिलाओं ने घाट पूजन किया तथा जलता हुआ दीपक लेकर घर के लिए प्रस्थान किया।
इलिया संवाददाता के अनुसार सूर्य उपासना का महापर्व डाला छठ पर सोमवार की शाम व्रती महिलाएं कस्बा सहित बेन, खखड़ा, बरियारपुर, बरहुआ, उसरी आदि गांवों के पोखरे एवं तालाब के घाटों पर पूजन अर्चन किया। सैयदराजा संवाददाता के अनुसार नगर पंचायत के समीप पोखरे पर शाम के वक्त स्नान ध्यान और घाट पूजन करने वाली महिलाओं की भीड़ जुटी। चहनियां संवाददाता के अनुसार बाजार में फलों की खूब खरीददारी हुई। इस दौरान घाटों की साफ सफाई की गई और लाइट की व्यवस्था की गई। बाबा कीनाराम मठ के संयोजक अजीत सिंह ने बताया कि मंगलवार को मारूफपुर सैदपुर घाट पर व्रती महिलाओं को अर्घ्य के लिए निशुल्क फल का वितरण किया जाएगा। इसी तरह टांडा, निधौरा घाट पर व्रतियों के साथ आने वालों को निशुल्क चाय पिलाया जाएगा। कमालपुर संवाददाता के अनुसार स्थानीय कस्बा स्थित पोखरे पर मंगलवार को शाम छठ व्रत पर रात में घट पर देवी जागरण किया जाएगा। यह कार्यक्रम समाज सेवा संगठन समिति की ओर से होगा। सोमवार को संगठन के दीपक त्रिसूलया, नियजुद्दीन, पवनेश,संतोष जायसवाल, अंकित जायसवाल ने बताया कि घ ाट परश साफ सफाई की गई है। चंदौली संवाददाता के अनुसार सूर्योपासना का पर्व डाला छठ को लेकर सोमवार को लोगों में उत्साह देखने को मिला। बाजार एक तरफ जहां पूजन सामग्रियों का मार्केट चमक रहा है तो दूसरी ओर फलों की कई किस्में दुकानों की शोभा बढ़ा रही है। खरीदारों की भीड़ बाजार की रौनक बढ़ गई है। वहीं जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। सोमवार को व्रती महिलाओं ने नगर के प्राचीन मां काली मंदिर स्थित तालाब एवं सावजी के पोखरे पर छठ पूजा के लिए पिंडी बनाकर के घाट पूजा किया।
विज्ञापन



.मानसरोवर तालाब सूर्य मंदिर पर रामायण पाठ शुरू

पीडीडीयू नगर। मानसरोवर तालाब स्थित सूर्यदेव मंदिर में छठ पूजा को लेकर 24 घंटे हरि कीर्तन समापन के बाद सोमवार को दोपहर में 24 घंटे का अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया गया। इसके पूर्व दोपहर में नौ कन्याओं द्वारा काशी से गंगा जल कलश में लाकर जल के साथ गौमूत्र, गाय का दूध, पंचगव्य के साथ तलाब में छोड़कर तालाब का शुद्धि करण किया गया। रात में आठ बजे छठ पूजा कमेटी के सदस्यों द्वारा पूरे घाट की धुलाई की गई। इस दौरान पूरे घाट को चुने से पोतकर लाल पेन्ट से घाट पर निशान बनाया गया। ताकि सभी व्रती लोगों को घाट मिल सके। इसी दौरान पवन शर्मा, अनिल उपाध्याय, सुशील कुमार, मोहित श्रीवास्तव, अमन, शाहिद, सुमित अनु, हिमांशु, श्याम, जितेंद्र, रवि मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें