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मौसम परिवर्तन से सरसों की फसल पर माहों का खतरा

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चंदौली। बार-बार मौसम का मिजाज बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार रात बादल छाने और सर्द हवाएं चलने के बाद गुरुवार को बूंदाबांदी होने से किसान सहम गए हैं। किसानों का मामना है कि यदि तेज बारिश संग ओलावृष्टि हुई तो फसलों को नुकसान पहुंचेगा। पिछले दो दिनों से मौसम गर्म हो रहा था। गुरुवार को सुबह बादलों की उमड़-घुमड़ के बीच ठंडी हवाएं चलने से मौसम का मिजाज बदला नजर आया। दोपहर में धूप निकली लेकिन शाम को आसमान में फिर बादल घिर आए और बूंदाबांदी होने लगी, जिससे किसानों को चिंता सताने लगी है। बारिश हुई तो गेहूं को तो फायदा होगा लेकिन आलू, चना और सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है। सरसों में माहों कीट का खतरा मड़राने लगा है। जिले में इस बार करीब 470 हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है। मौसम में उतार-चढ़ाव से सरसों के फूलों पर माहों कीट का खतरा बढ़ जाता है। किसान रमेश यादव, सुरेश मौर्य बताते हैं कि अगर इसकी रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो सरसों की फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा। लिहाजा सरसों के फूलों पर कीटनाशक का छिड़काव करना होगा। कृषि वैज्ञानिक डा. समीर पांडेय ने बताया माहों की रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफास-20 दवा एक लीटर या मोनोक्रोटोफास-36 एसएल दवा एक लीटर सात से आठ सौ लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में छिड़काव करें तो माहों के प्रकोप से सरसों की फसल को बचाया जा सकता है।
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