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मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं

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चकिया। चंद्रप्रभा साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को श्रीआदित्य पुस्तकालय परिसर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से किसानों की दुर्दशा को व्यक्त किया।
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गोष्ठी की शुरूआत तेजबली अनपढ़ की वाणी वंदना से हुई। काव्य गोष्ठी के पहले पायदान पर आए कवि घनश्याम सिंह ने जवन गति तोर रउआ, उहे गति मोर बाय, अलियार प्रधान ने दिनो-दिन होत हय परेशानी, करल का जाय किसानी, राजेश विश्वकर्मा राजू ने नाही नौकरी में बा, न दुकानी में दम सुनाया, बंधु पाल बंधु अपनी कविता के माध्यम से किसानों की दुर्दशा को व्यक्त किया। ज्योति कुमार द्विवेदी ने कइसो ढोई लेवा वाली गठरी, चुनरी सपनवा भईली ननदो सुनाया तो वही रामअलम सिंह जीवन ने सबसे दुर्दशा में भयल देश क किसानी सुनाया। राजेन्द्र प्रसाद भ्रमर ने धन-धन करेजा तोहार, तपसी किसान हो सुनाया, संतोष कुमार धूर्त ने आओ मिल-जुलकर दीपावली का पर्व मनाये हम, राजेन्द्र प्रसाद बावरा ने शहरो में देवता बसे, मानवता चरने गई सुनाकर लोगों का दिल जीता। गोष्ठी में हरवंश सिंह बवाल, प्रदीप कुमार पाठक, रमेश कुमार, बेनजीर किया। अध्यक्षता राजेन्द्र प्रसाद बावरा ने और संचालन हरिबंश सिंह बवाल ने किया।
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