चंदौली। मानदेय सहित विभिन्न मांगों को लेकर मुखर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को धरनास्थल से लेकर कचहरी तक मशाल जुलूस निकाला। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। कहा कि कार्यकर्ताओं ने ठान लिया है कि इस दफा लड़ाई आर या पार की होगी। सरकार को जगाने के लिए आठ दिसंबर को एक दिवसीय भूख हड़ताल का निर्णय लिया।
धरने के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सम्मानजनक मानदेय देने का अपना वादा अभी तक पूरा नहीं किया है। इसके अतिरिक्त पंजीरी घोटाले की जांच भी शुरू नहीं कराई है। जबकि संगठन की ओर से घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी। जिलाध्यक्ष सुषमा मिश्रा ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 18 हजार और सहायिकाओं को दस हजार रुपये मानदेय देने, केंद्रों पर सुविधाएं मुहैया कराने, चिकित्सकीय अवकाश देने और हाट कुक्ड योजना का शुरू कराने आदि मांगों को लेकर कार्यकर्ताओं का आंदोलन चलता रहेगा। कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया तो पूरे प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आमरण अनशन शुरू कर देंगी। इस अवसर पर प्रतिमा, मंजू यादव, रूही परवीन, नमूना, महिमा, आसमिन, सीमा, अंजू, कुसुम, नीतू आदि रहीं।
चंदौली। सम्मानजनक मानदेय और आशा केंद्रों की स्थापना की मांग को लेकर आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं का धरना गुरुवार को भी जारी रहा। कार्यकर्ताओं ने विभागीय एएनएम और आशा संगिनी पर आंदोलन बंद करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। चेतावनी देते हुए कहा कि आशाएं किसी के दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने 18 हजार रुपये प्रति माह मानदेय देने, आशा केंद्रों की स्थापना करने व सामाजिक सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की।