दवा खरीद के मामले में घोटाला उजागर होने पर दो पूर्व सीएमओ सहित अन्य कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय के बाबू व अन्य स्टाफ पुरानी फाइलों से धूल हटाने और दुरुस्त करने में जुटे रहे। सीएमओ डॉ. पीके मिश्रा भी अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर अपने कार्यकाल के दौरान हुए दवा खरीद के बही खाते को ठीक कराने में लगे रहे।
कानपुर के पनकी स्थित मेसर्स निर्मल इंडस्ट्रीज एंड कंपनी के मालिक प्रवीण सिंह ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन में शिकायत की थी। आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की दवा बनाने वाली कंपनी की आड़ लेकर सरकारी अस्पतालों में नकली दवाओं के वितरण में करोड़ों रुपये की अनियमितता की गई है। वर्ष 2004-05 व 2005-06 में चंदौली में दवा खरीद में घोटाला का मामला संज्ञान में आने के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान की टीम ने जांच पड़ताल शुरू की। पिछले दिनों चंदौली पहुंच कर भी जांच पड़ताल की थी। टीम का आतिथ्य सत्कार भी विभाग द्वारा किया गया। इसके बाद जांच टीम वापस हो गई। माना गया कि इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इससे अधिकारी कर्मचारी निश्चिंत हो गए। वहीं प्रदेश में सरकार बदलते ही इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई शुरू हो गई है। इसके तहत ईओडब्लू ने चंदौली से दो सीएमओ सहित सात पर मुकदमा दर्ज कराया है। इसकी जानकारी होने के बाद चंदौली सीएमओ पीके मिश्रा ने अपने समय के सभी कागजात को दुरुस्त करने लगे रहे। वहीं बाबू लोग पुराने फाइलों की धूल साफ करने में पूरे दिन परेशान रहे।