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गुरु ही जीव का परमात्मा से कराता है मिलन

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गुरु ही जीव का परमात्मा से कराता है मिलन
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अमड़ा गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बोले कथावाचक अवनीश महाराज
सचित्र-
अमर उजाला ब्यूरो
कंदवा। बिन गुरु भवनिधि तरय न कोई, जो बिरंचि शंकर सम होई। बिना गुरु के कोई इस भवसागर को पार नहीं कर सकता है। गुरु भगवान शंकर के समान होता है। गुरु ही मनुष्य को भवसागर से पार लगा सकता है। गुरु ही जीव का परमात्मा से मिलन कराता है और मुक्ति के द्वार तक ले जाता है।
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यह बातें वृंदावन से पधारे आचार्य अवनीश जी महाराज ने अमड़ा गांव के शिव मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कहीं। कहा कि सद्गुरु एक ऐसी शक्ति है जो मनुष्य को भवसागर से पार लगा सकती है। गुरु ही मनुष्य को ईश्वर से मिला सकता है। कथा को विस्तार देते हुए कहा कि आत्मा ही परमात्मा है। श्रृंगी ऋषि के श्राप देने पर राजा परीक्षित भगवान शुकदेव के पास गए और आपबीती सुनाई। सप्ताह भर के अंदर मृत्यु सुनिश्चित मानकर निराश हुए राजा ने उनसे श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा। इस पर शुकदेव ने उन्हें आत्मा और परमात्मा का ज्ञान कराते हुए कहा कि आत्मा ही परमात्मा है। उन्होंने महाराज परीक्षित से कहा कि यह विधि का विधान है कि जो मृत्युलोक में आया है उसे संसार छोड़कर जाना ही होगा। उन्होंने सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने का उपाय बताते हुए श्राप से मुक्ति का रास्ता बताया। इस दौरान अनिल सिंह, सतेंद्र सिंह, शिवबचन सिंह, संजय सिंह, शिवकांत सिंह, बलवीर सिंह, अर्जुन सिंह, छाया, रीमा, गीता, लीलावती, रमावती, राजू सिंह, शशि, विनोद सिंह, अशोक, मृत्युंजय चौरसिया मौजूद रहे।
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