पीडीडीयू नगर। बिहार प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश चंद्र श्रीवास्तव का शुक्रवार की देर रात नगर के कैलाशीपुरी स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वरिष्ठ साहित्यकार के निधन की खबर मिलते ही साहित्यकारों की भीड़ उनके आवास पर पहुंच गई। साहित्यकारों ने जगह जगह गोष्ठी के माध्यम से सुरेशचंद श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सेवानिवृत्ति के बाद सुरेशचंद्र श्रीवास्तव बिहार से आकर नगर में अपना रिहायशी ठिकाना बनाया और साहित्य साधना में जुटे रहे। साहित्यिक मंचों एवं मीडिया से दूर रहकर सुरेश चंद्र श्रीवास्तव अपनी लेखनी को मजबूत करते थे। उन्होंने 11 उपन्यास, कई काव्य संग्रह, बाल कहानियां और ललित निबंध के साथ दो खंडों में अपनी आत्मकथा लिखी। आत्मकथा डिप्टी कलेक्टर को काफी सराहना मिली और यह उनकी पहचान बनी। वहीं वनवासी जीवन पर इनका उपन्यास बनतरी चर्चित रहा। शनिवार को वाराणसी में सुरेशचंद का अंतिम संस्कार किया गया। साहित्यिक संस्था साहित्यान की नगर में कैंप कार्यालय पर हुई सभा में साहित्यकारों ने सुरेशचंद्र के निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। शोक सभा में रेलवे के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्रा, कृष्णकांत श्रीवास्तव, डॉ. अनिल यादव, अरूण आर्य, सुरेश अकेला, रामजी प्रसाद भैरव, विजय मिश्रा बुद्धिहीन उपस्थित रहे।