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स्वर्वेद पाठ और अमृतवाणी से दी आध्यात्म की जानकारी

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यज्ञ
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चंदौली। क्षेत्र के तारजीवनपुर में शनिवार को विहंगम योग परिवार की ओर से वैदिक हवन और सत्संग का आयोजन हुआ। जिसमें लोगों ने वेद मंत्रों के साथ विश्व कल्याण के लिए हवन कुंड में आहुति डाली। वहीं विद्वानों ने स्वर्वेद पाठ और अमृतवाणी के माध्यम से लोगों को धर्म और आध्यात्म के बारे में जानकारी दी। साथ गौ सेवा और नशा मुक्ति के लिए लोगों को शपथ दिलाया गया।
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कार्यक्रम के दौरान पुरोहित संतोष अग्रवाल ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण है। यज्ञ से प्रेम, शांति, भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति, अंत:करण में वृद्धि तथा वातावरण शुद्ध होता है। यज्ञ से ईष्या, द्वेष, कलह, अशांति नष्ट होती है। उन्होंने कहा कि विहंगम योग विरासत के रूप में अध्यात्म को सहज रूप से प्रदान किया है। वक्ता जनार्दन सिंह ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के अंदर आत्मा की ध्वनि को सुनने का सामर्थ्य उत्पन्न हो जाता है। तब उसका कर्म धर्म बन जाता है। कहा कि यहां योग, सेवा, सत्संग व साधना की त्रिवेणी है। इस त्रिवेणी में स्नान कर साधक शांति महसूस करता है। योग का संबंध चेतन सत्ताओं के योग से है। मन के अनियंत्रित होने से विश्व में अनेक प्रकार की समस्याएं है। मन पर नियंत्रण आवश्यक है। कहा कि विहंगम योग के स्वर्वेद अनुभवों की गाथा है। स्वर्वेद के पठन मात्र से ही शुभ संस्कार का उदय होता है। इस दौरान केशव अग्रहरि, शैलेंद्र शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, बशिष्ठ सिंह, विष्णु, मीना देवी, गुलाब यादव, चंद्रप्रकाश, अमरनाथ सिंह, शिवशंकर आदि उपस्थित रहे।
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