शिकारगंज। काशी वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्रों में मौजूद पर्यटन केंद्रों पर नये साल पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। वहीं पर्यटन केंद्रों पर न्यू ईयर के लिए कोई खास तैयारी नहीं दिखाई दे रही है। स्वच्छता अभियान पर प्रकाश डालें तो पर्यटन केंद्रों पर प्लास्टिक कचरे भरी फैले हुए हैं।।
काशी वन्य जीव प्रभाग में राजदरी, देवदरी, औरवाटाड़ (बड़ीदरी), कोईलरवा हनुमान मंदिर, लतीफशाह, मूसाखांड़, जागेश्वरनाथ धाम जैसे पर्यटन केंद्र अवस्थित हैं। वाराणसी, विंध्याचल मंडल अतिरिक्त बिहार के कैमूर जिले के सर्वाधिक सैलानी न्यू ईयर सेलिबेशन के लिए इन्हीं पर्यटन केंद्रों का रूख करते हैं। चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार में स्थित होने के कारण राजदरी तथा देवदरी पर्यटन केंद्रों के आस-पास वन्य जीवों का भी बसेरा है। इसलिए इन पर्यटन केंद्रों पर प्रवेश के लिए भारी-भरकम शुल्क देना पड़ता है। इसके बावजूद भी पर्यटकों की पहली पसंद ये पर्यटन केंद्र ही हैं। प्रवेश शुल्क देने वाले अक्षम पर्यटक औरवाटाड़, कोईलरवा हनुमान जी, लतीफशाह तथा मूसाखांड़ की ओर रूख करते हैं। पर्यटन केंद्रों पर वर्ष भर सैलानियों के आगमन से पर्यटन केंद्रों पर प्लास्टिक के कचरे बिखरे दिखाई दे रहे हैं। केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा हैै। पर्यटक केंद्रों की साफ-सफाई का न तो कोई ठोस इंतजाम है और न ही नए वर्ष को लेकर कोई खास इंतजाम किया गया है। डीएफओ गोपाल ओझा कहते हैं कि वन्य जीव प्रभाग में प्राकृतिक पर्यटन केंद्र हैं। यहां कुछ बंदिशें हैं जिनका पालन पर्यटकों को करना होता है।
1. वन्य जीव विहार में राजदरी-देवदरी पर्यटन केन्द्र स्थित हैं।
2. वन्य जीव विहार में आग जलाना, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के जरिए शोर मचाना वर्जित हैं।
3. विहार में प्लास्टिक का कचरा फेंकना भी मना है।
4. विहार में लाइसेंसी असलहा भी लेकर जाना वर्जित है।5. भोजन बनाना भी प्रतिबंधित है।