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आध्यात्म ने भारत को बनाया विश्वगुरु

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चंदौली। सदर कोतवाली के रेवसां गांव में जनार्दन सिंह के आवास पर रविवार को विहंगम योग परिवार की ओर से सत्संग प्रवचन और योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें वक्ताओं ने सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित किया। साथ ही गौ सेवा और गंगा की अविरलता के लिए लोगों को संकल्प दिलाया गया। इस दौरान निधि कुमार ने सदाफलदेव महराज द्वारा रचित भजनों को प्रस्तुत करके लोगों का मन मोह लिया।
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कार्यक्रम के दौरान वक्ता बशिष्ठ सिंह ने कहा कि भारत वर्ष की पहचान विश्व में जगतगुरु के रुप में है, जो भविष्य में भी रहेगी। आध्यात्म विद्या का प्रवाह भारत से निकलकर पूरे विश्व को ब्रह्म विद्या के ज्ञान से अलोकिक कर रही है। विहंगम योग इस विद्या का ज्वलंत उदाहरण है। वक्ता प्रद्युम्न अग्रहरि ने कहा कि तन का आसन हठ जानता है, लेकिन मन और आत्मा का आसन के आध्यत्म के द्वारा ही जाना जा सकता है। कहा कि आध्यात्म को जानने वाला आमत्व को प्राप्त कर लेता है। यह ज्ञान केवल विहंगम योग के आध्यात्म विज्ञान के माध्यम से ही प्राप्त हो सकता है। कहा कि बीस कला विभूषित अनंत सद्गुरु सदाफल देव महराज ने अपने कठोर तपस्या के बदौलत इस विद्या को प्राप्त किया और विहंगम योग इसे पूरे विश्व में पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। कहा कि गृहस्थ जीवन व्यतित करने वाला व्यक्ति भी नियमित साधना करके मोझा को प्राप्त कर सकता है। बस उसमें आध्यात्म के प्रति आस्था होनी चाहिए। इस दौरान अमरनाथ सिंह, बशिष्ठमूनि सिंह, शिशंकर, प्यारेलाल, विष्णु, प्रशांत सिंह, निशांत सिंह, पवन यादव, सुजीत चौहान, मनोरमा देवी, बिंदु सिंह, माया देवी, रामवंती देवी आदि उपस्थित रहे।
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