चंदौली । किसान गेहूं की बोआई के पूर्व बीज शोधन अवश्य करें। इससे फसल में रोग जनक फफूंदी कीट तो नष्ट होंगे ही उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होगी। इसके लिए सबसे उपयुक्त ट्राइकोडर्मा (जैविक रासायन) है। इसके प्रयोग से फसल में बीमारी की संभावना कम हो जाती है। यह कृषि रक्षा इकाई की ओर से किसानों को 75 फीसद छूट पर मिल रहा है।
ये बातें कृषि वैज्ञानिक डॉ समीर ने पांडेय ने कही। कहा कि उत्पादन की चाहत में किसान के अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रतिदिन कम हो रही है। वहीं मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों में भी कमी आ रही है। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी लाने को कृषि विभाग की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की ओर से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सके। इसमें ट्राइकोडर्मा की उपयोगिता महत्वपूर्ण हो गई है। ये जैविक रासायन मानव व पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं। कृषि वैज्ञानिक डा.समीर पांडेय ने कहा रासायनिक उर्वरकों से खेत की उर्वरा शक्ति पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को बीज शोधन को ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करना चाहिए। विभाग की ओर से 75 फीसदी छूट पर जैविक रासायन दिया जा रहा है। किसान गेहूं की बोआई में तेजी लाए, नहीं तो बोआई पिछड़ जाएगी।