चकिया। कर्मनाशा सिस्टम के दो बड़े बांधों मूसाखाड़ तथा नौगढ़ में कुल मिलाकर मात्र 100 मिलियन घन फीट पानी ही मौजूद है। यह पानी धान की रोपाई के लिए काफी कम है। मूसाखाड़ बांध को पानी देने वाले इंटर स्टेट जल स्रोत भी पूरी तरह सूख गए हैं।
धान के कटोरे के दक्षिणी हिस्से की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली कर्मनाशा सिस्टम की नहरें सूख चुकी है। वही कर्मनाशा सिस्टम के बांधों में कुल क्षमता 7500 मिलियन घन फीट पानी के सापेक्ष मात्र 100 मिलियन घन फीट पानी ही मौजूद है। इस पानी को लतीफशाह बीयर में छोड़ने का फैसला जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित सिंचाई बंधु की बैठक में हो चुका है। बावजूद इसके इस पानी से धान की रोपाई होना असंभव है। कर्मनाशा सिस्टम की सभी नहरें फुल गेज से चलाये जाने पर प्रतिदिन 70 मिलियन घन फीट पानी खींचती है। इस हिसाब से इस पानी से नहरे डेढ़ दिन भी नही चल सकती। वहीं लतीफशाह बीयर पूरी तरह सूख चुका है। इससे नहरों में पानी छोड़ना दूर की कौड़ी समझ में आ रहा है। क्षेत्र के सबसे बड़े बांध मूसाखाड़ के जलाशय में जल आपूर्ति उत्तर प्रदेश की कर्मनाशा नदी के साथ बिहार से निकली गुरवट तथा लोरसी नदियों से होती है। उत्तर प्रदेश के साथ ही पश्चिमी बिहार के भभुआ जिले में भी मानसून की बरसात नहीं हो रही है। इससे गुरवट एवं लोरसी नदियों में भी पानी नहीं है।
शहाबगंज क्षेत्र के मसोई गांव के निवासी भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणजीत सिंह के अनुसार बारिश होने के बाद इनकी स्थितियों में सुधार होगा। क्षेत्र के भगवान सिंह, सरजू सिंह, प्रमोद चौहान, नंदलाल पांडेय, राजेन्द्र द्विवेदी, रामप्रताप यादव, राजकुमार मौर्या आदि किसानों का कहना है कि यदि एक सप्ताह में बारिश अच्छी नहीं हुई तो धान की खेती प्रभावित होगी है।