चंदौली। जिला प्रशासन और सहकारी समितियों एवं पीसीएफ की लापरवाही से 20 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं भीगने और खराब होने के कगार पर है। जिले के क्रय केंद्रों से खरीदे गए गेहूं को सहकारी समितियों पर रख दिया गया लेकिन वहां से अब तक उठान नहीं किया गया है। इसमें ज्यादातर गेहूं सहकारी समितियों पर पड़े हैं। समितियों पर गेहूं खरीदने और उसके उठान की जिम्मेदारी पीसीएफ की थी मगर पीसीएफ अधिकारियों की लापरवाही से गेहूं बारिश में दीवारों की सीलन से खराब हो रहा है। पीसीएफ और सहकारी समितियों के अधिकारी गेहूं उठान को लेकर एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। यह तब है जब दोनों विभागों के अधिकारियों ने करीब दस दिन पहले कहा था कि एक सप्ताह में गेहूं का उठान करा लिया जाएगा।
जिले में बने 86 गेहूं क्रय केंद्रों पर करीब 65 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया। इसमें 36 सहकारी समितियों और चार कृषक सेवा केंद्रों यानी कुल 40 क्रय केंद्रों पर पीसीएफ को करीब 28 हजार एमटी गेहूं खरीद करनी थी। पीसीएफ ने गेहूं तो खरीद कर ली लेकिन उसका उठान अब तक नहीं करा सका। अधिकारियों की लापरवाही से अभी 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं खुले में या फिर समितियों में डंप हैं। समितियों में रखा गेहूं बारिश में सीलन से खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है। वहीं जहां बाहर रखे गये हैं वहां गेहूं बारिश से भीग रहे हैं।
जिले के बबुरी, दिघवट, नोनार, कैलावर, सिकरी, कठौली, कबीरपुर, मारुफपुर और नादी सहित 30 से अधिक सहकारी समितियों पर गेहूं अभी डंप पड़ा हुआ है। नतीजतन अब यह गेहूं बारिश में सीलन से खराब होने की स्थिति में पहुुंच गए हैं या फिर खुले में रखे जाने पर बारिश में भींग रहे हैं।
कोट
-सहकारी समितियों से गेहूं का उठान काफी धीमी गति से हो रहा है। इसके चलते समितियों के गोदाम नहीं खाली हो पा रहे हैं। इसके लिए पीसीएफ को तीन बार पत्र लिखा जा चुका है। साथ ही जिलाधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है। डीके अग्रवाल, सहायक निबंधक कोआपरेटिव।
-समितियों से गोदामों पर गेहूं भिजवाया जा रहा है। अब तक 50 फीसदी गेहूं का उठान हो चुका है। बाकी बचे गेहूं को समितियों से भेजा जा रहा है।
मोहनिया, व्यासनगर और डीरेका गोदाम पर रखा जा रहा है। शशिकांत भारती, पीसीएफ प्रबंधक
भुगतान के लिए विपणन अधिकारी का घेराव
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौली। किसान विकास मंच के लोगों ने गेहूं खरीद के बाद किसानों का भुगतान नहीं होने पर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी अनूप श्रीवास्तव का घेराव किया। नाराज किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंच डीएम को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त एसडीएम जियालाल को सौंपा और किसानों की उपज का भुगतान कराने की मांग किया।
किसान विकास मंच के अध्यक्ष जैराम सिंह ने कहा कि नेफेड के क्रय केंद्र मसोई, यूपी एग्रो के सैदुपुर पर अपनी उपज बेचने के बाद भी किसान भुगतान के लिए परेशान हो रहै हैं। कहा कि दोनो केंद्रों के प्रभारियों द्वारा 70 प्रतिशत किसानों का भुगतान नहीं किया गया है। चेताया कि तीन दिन के अंदर किसानों की उपज का भुगतान नहीं किया गया तो किसान विकास मंच के लोग अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। इस दौरान राधेश्याम पांडेय, लक्ष्मण सिंह, प्रेम नारायण सिंह, अयूब खां, रामअवध, अशोक दूबे, डब्बू चौहान, केशव विश्वकर्मा, रविंद्र सिंह, बद्री यादव, संजय सिंह, डब्बू सिंह मौजूद रहे।
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अधिकारियों की लापरवाही से बारिश में खराब होने के कगार पर गेहूं
गेहूं डंप होने से समितियों पर खाद भी नहीं पहुुंच पा रही
सहायक निबंधक कोआपरेटिव और पीसीएफ प्रबंधक एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौली। जिला प्रशासन और सहकारी समितियों एवं पीसीएफ की लापरवाही से 20 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं भीगने और खराब होने के कगार पर है। जिले के क्रय केंद्रों से खरीदे गए गेहूं को सहकारी समितियों पर रख दिया गया लेकिन वहां से अब तक उठान नहीं किया गया है। इसमें ज्यादातर गेहूं सहकारी समितियों पर पड़े हैं। समितियों पर गेहूं खरीदने और उसके उठान की जिम्मेदारी पीसीएफ की थी मगर पीसीएफ अधिकारियों की लापरवाही से गेहूं बारिश में दीवारों की सीलन से खराब हो रहा है। पीसीएफ और सहकारी समितियों के अधिकारी गेहूं उठान को लेकर एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। यह तब है जब दोनों विभागों के अधिकारियों ने करीब दस दिन पहले कहा था कि एक सप्ताह में गेहूं का उठान करा लिया जाएगा।
जिले में बने 86 गेहूं क्रय केंद्रों पर करीब 65 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया। इसमें 36 सहकारी समितियों और चार कृषक सेवा केंद्रों यानी कुल 40 क्रय केंद्रों पर पीसीएफ को करीब 28 हजार एमटी गेहूं खरीद करनी थी। पीसीएफ ने गेहूं तो खरीद कर ली लेकिन उसका उठान अब तक नहीं करा सका। अधिकारियों की लापरवाही से अभी 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं खुले में या फिर समितियों में डंप हैं। समितियों में रखा गेहूं बारिश में सीलन से खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है। वहीं जहां बाहर रखे गये हैं वहां गेहूं बारिश से भीग रहे हैं।
जिले के बबुरी, दिघवट, नोनार, कैलावर, सिकरी, कठौली, कबीरपुर, मारुफपुर और नादी सहित 30 से अधिक सहकारी समितियों पर गेहूं अभी डंप पड़ा हुआ है। नतीजतन अब यह गेहूं बारिश में सीलन से खराब होने की स्थिति में पहुुंच गए हैं या फिर खुले में रखे जाने पर बारिश में भींग रहे हैं।
कोट
-सहकारी समितियों से गेहूं का उठान काफी धीमी गति से हो रहा है। इसके चलते समितियों के गोदाम नहीं खाली हो पा रहे हैं। इसके लिए पीसीएफ को तीन बार पत्र लिखा जा चुका है। साथ ही जिलाधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है। डीके अग्रवाल, सहायक निबंधक कोआपरेटिव।
-समितियों से गोदामों पर गेहूं भिजवाया जा रहा है। अब तक 50 फीसदी गेहूं का उठान हो चुका है। बाकी बचे गेहूं को समितियों से भेजा जा रहा है। मोहनिया, व्यासनगर और डीरेका गोदाम पर रखा जा रहा है। शशिकांत भारती, पीसीएफ प्रबंधक