भले ही सूबे की योगी सरकार एक्शन मोड में है लेकिन जिले की पुलिस का रवैया पुराने ढर्रे पर है। जहांगीराबाद के एक गांव में पुलिस की मौजूदगी में जो कुछ हुआ है वह खाकी का रवैया बयां करने के लिए काफी है।
इसके अलावा अरनियां में गोकशी के बाद बवाल और उससे पहले अगस्त 2016 में हाईवे पर गैंगरेप मामले में भी पुलिस बैकफुट पर रही है। वहीं, जहांगीराबाद में हुई घटना पर सांसद ने निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया।
निजाम भले ही बदल गया लेकिन खाकी अपनी सुस्ती का चोला उतारने को तैयार नहीं है। जहांगीराबाद गैंगरेप के मामले में पुलिस का रवैया ढुलमुल है। अब तक 16 में से महज पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के सवाल पर सीओ श्रेष्ठा सिंह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रही हैं।
वहीं, घटना के 15 दिन बाद एसएसपी की ओर से जारी सस्पेंशन का आदेश जहांगीराबाद कोतवाली में नहीं पहुंचना पुलिस की लापरवाही उजागर करता है। पुलिस ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए सिर्फ एक सिपाही गांव में छोड़ रखा है।
जब भारी पुलिस की मौजूदगी में पीड़ित परिवार का घर फूंका जा सकता है तो एक सिपाही सुरक्षा कैसे कर सकता है। इन सब सवालों पर पुलिस के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। इतना ही नहीं दो दिन पूर्व अरनियां में गोकशी के बाद पूर्व थानेदार पर लगे आरोप के बाद उसका गैर जनपद तबादला भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।