घटना का विवरण
सूत्रों के अनुसार, जल निगम द्वारा पाइपलाइन बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा था। इसी दौरान, काम कर रहे मजदूर पर अचानक मिट्टी की एक बड़ी ढांग गिर गई। ढांग इतनी भारी थी कि उसमें एक मजदूर बुरी तरह दब गया। आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन मिट्टी इतनी ज्यादा थी कि मजदूर को बाहर निकालने में करीब चार घंटे का लंबा समय लग गया। दुर्भाग्यवश, जब तक मजदूर को बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
लापरवाही के आरोप, जिम्मेदार फरार
इस दुखद घटना ने निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही को उजागर किया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसे के तीन घंटे बाद ही जेसीबी मशीन मौके पर पहुंची, जिससे बचाव कार्य में देरी हुई। सबसे गंभीर बात यह है कि हादसे के बाद कांट्रेक्टर, सुपरवाइजर और कंपनी के अन्य जिम्मेदार लोग मौके से फरार बताए जा रहे हैं। उनकी इस तरह की हरकतें घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों के गुस्से को और भी बढ़ा रही हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश, मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलते ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। उन्होंने निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। गुस्साए ग्रामीणों ने मृतक मजदूर के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, वे शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं जाने देंगे।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने किसी तरह ग्रामीणों को शांत कराया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार चल रहे कांट्रेक्टर व सुपरवाइजर की तलाश जारी है। इस घटना ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुद्दा उठाया है, जिस पर प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।