मथुरा जिले के गांव सीगौनी निवासी राजेंद्र सिंह ने 7 जून 2018 को तत्कालीन एसएसपी बुलंदशहर को तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि उनकी पुत्री ममता की शादी 8 मई 2017 को खुर्जा के गांव सौंदा हबीबपुर निवासी सुमित से हुई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और उसकी 28 मई 2018 को हत्या कर दी गई।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर पति सुमित, सास रूपमती और ससुर देवेंद्र को जेल भेज दिया।12 फरवरी 2019 को उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। मामले में सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में यह पहले ही साफ हो चुका था कि ममता की मृत्यु किसी जहरीले कीड़े के काटने से हुई थी।
तत्कालीन सीओ खुर्जा ने जिरह के दौरान खुद स्वीकार किया कि उन्हें इस बात की जानकारी थी। इस दौरान पीडब्ल्यू-4 नायब तहसीलदार विपिन कुमार और पीडब्ल्यू-5 डॉ. अजय कुमार ने स्पष्ट कहा था कि मृत्यु जहरीले कीड़े के काटने से हुई है। झाड़-फूंक करने वाले रनवीर स्वामी ने भी बयान दिया था कि कुछ ग्रामीण युवती को उनके पास लाए थे, जिसकी नब्ज टूट चुकी थी। उसके हाथ पर सांप के काटने के निशान थे।
17 नवंबर 2018 को आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार विसरा में आरगेनोक्लोरो इन्सेक्टिसाइड पाया गया था। यह सांप के जहर में होता है। बावजूद इसके, पुलिस ने निर्दोषों को जेल भेज दिया और मुकदमे को सात साल तक घसीटा।
अदालत ने लगाई फटकार... पंगु विवेचना से बर्बाद हुए सात साल
न्यायाधीश शहजाद अली ने अपने फैसले में लिखा कि विवेचक को पता था कि मौत प्राकृतिक कारणों (सांप के काटने) से हुई है। ऐसे में उनका दायित्व था कि वे सीएमओ का बोर्ड गठित करवाकर राय लेते। विवेचक की लापरवाही के कारण पति सुमित को पांच साल तक जेल में रहना पड़ा। सास-ससुर भी कई महीने तक जेल में रहे।
अदालत ने इसे मानवाधिकारों का हनन माना। कोर्ट ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को निर्देशित किया है कि आदेश की कॉपी मिलने के तीन माह के भीतर तीनों पीड़ितों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
गूगल सर्च ने खोली पुलिस की पोल
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि विसरा रिपोर्ट में जिस आरगेनोक्लोरो इन्सेक्टिसाइड जहर का जिक्र था, वह सामान्यतः सांप के विष में पाया जाता है। यह तथ्य गूगल सर्च और मेडिकल लिटरेचर से भी स्पष्ट हुआ।
विडंबना यह रही कि जो जानकारी एक सामान्य सर्च से स्पष्ट थी, उसे पुलिस के उच्चाधिकारी (सीओ स्तर के विवेचक) ने नजरअंदाज कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष होती, तो विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी जाती। एक परिवार को सात साल तक हत्यारे होने का दंश न झेलना पड़ता।
सास पांच महीने, पति पांच साल रहा जेल में
विवेचक की एक गलत चार्जशीट ने तीन लोगों का जीवन अंधकार में डाल दिया। इसके चलते मृतका के पति सुमित को 9 जनवरी 2019 से 23 दिसंबर 2023 तक (लगभग 5 साल) जेल में रहना पड़ा। ससुर देवेंद्र को 6 फरवरी 2019 से 15 अप्रैल 2019 तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा। सास रूपवती भी 6 फरवरी 2019 से 16 जून 2019 तक जेल में रहीं। अदालत ने कहा कि निर्दोष होने के बावजूद इतने लंबे समय तक जेल में रहना और समाज में कलंकित होना अपूरणीय क्षति है।