बुलंदशहर। अक्तूबर माह में समय-समय पर हो रही बारिश के साथ ही मौसम के बदलते तेवर अब लोगों की सेहत पर असर डालने लगे है। दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव होने से अस्थमा व सांस के मरीजों को परेशानी बढ़नी शुरू हो गई है। वहीं, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी के मरीज भी बढ़ गए है। प्रतिदिन सरकारी चिकित्सालय से लेकर निजी चिकित्सालयों में चिकित्सकों के पास मरीज पहुंच रहे है। इनमें बुजुर्गों की संख्या अधिक है। चिकित्सक दवा के साथ उन्हें संतुलित भोजन, विशेष सावधानी और ठंड से बचाव की सलाह दे रहे है।
दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव होने से लोगों को नजला, खांसी और वायरल बुखार की समस्या बनी हुई है। इसके साथ ही अस्थमा एवं सांस के रोगियों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। जिला चिकित्सालय के परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र सिंह ने बताया कि तापमान में बदलाव अस्थमा के मरीजों को परेशान करने लगा है। कई मरीजों को हल्की सर्दी-जुकाम या संक्रमण के बाद सांस लेने में परेशानी हो रही हैं।
बीमारी से बचने के लिए संतुलित खानपान, मौसमी फल व सब्जियों का प्रयोग करें। ठंडे और तली-भुनी खाद्य वस्तुओं से परहेज करें। अस्थमा के मरीज दवा बीच में न छोड़ें। धूल-धुआं से बचाव करें, घर में साफ सफाई रखें, घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें। बताया कि जब भी मौसम बदलता है तो सांस व अस्थमा के मरीजों को परेशानी होती हैं। इस समय सांस और अस्थमा के 20 से 40 मरीज आ रहे हैं। मौसम में बदलाव के कारण के नजला, खांसी और वायरल के मरीज सबसे ज्यादा है।
ये बरतें सावधानी
- गर्म कपड़े पहनें।
- प्रदूषण वाले स्थानों से दूर रहें।
- सुबह शाम बाहर निकलने से बचें।
- गर्म पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।
- बाहर निकलते समय मास्क पहनें।
- अस्थमा मरीज इनहेलर और दवाएं नियमित लेते रहें।
- घर के अंदर ही नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें।
कोट
अस्थमा के मरीजों को बदलते मौसम में पहले से सतर्क रहना चाहिए। मौसम में बदलाव से नजला, खांसी और वायरल के मरीज अधिक आ रहे है। पिछले कई दिनों से सांस व अस्थमा के मरीज भी आने लगे है। - डॉ. प्रदीप राणा, प्रभारी सीएमएस जिला चिकित्सालय
चेतन शर्मा