सिंचाई विभाग के करोड़ों के भ्रष्टाचार पर अफसरों ने मंगलवार को पानी छोड़ दिया। बिना सफाई कराए जिले की पांच नहरों और इससे जुडे़ 27 रजवाहों में पानी छोड़ कर सफाई के नाम पर जारी हुए करीब 50 करोड़ की राशि के बंदरबांट को छिपाने की कोशिश की गई है।
इससे जहां एक ओर निगरानी सिस्टम को धता बता दिया गया, वहीं करोड़ों के भुगतान से पहले नियमानुसार काम का सत्यापन तक नहीं कराया गया। मंगलवार सुबह जिले की सभी पांच नहरों और उनसे निकल रहे 27 रजवाहों में पानी छोड़ दिया गया। इन नहरों और रजवाहों की बिना सफाई कराए ही पानी छोड़ दिया गया।
मुख्य मार्ग व आबादी के किनारे पड़ने वाली नहर के थोड़े से हिस्से की सफाई कराकर ड्रामा किया गया, लेकिन जंगला और खेत के बीच से निकल रहे नहरों - रजवाहों में सफाई नहीं कराई गई। इसके साथ ही सफाई के नाम पर आए 50 करोड़ के बजट की बंदरबांट कर ली गई।
बंदरबांट को छिपाने के लिए आननफानन में पानी छुड़वाया गया। सफाई कार्य का सत्यापन तक नहीं कराया गया। जबकि भुगतान करने व पानी छोड़ने से पहले ऐसा करना अनिवार्य है। इसके बिना बजट धनराशि आवंटित की ही नहीं जा सकती है। नहरों की सफाई तो दूर इनमें खड़ी झाड़ियों को भी साफ नहीं कराया गया।
ऐसे में इस बार भी टेल तक पानी पहुंचने की उम्मीद करना बेकार है। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद डीएम व सीडीओ ने सफाई का भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया था। इस डर से आनन-फानन में पानी छोड़ दिया गया और निगरानी सिस्टम को धता बता दिया गया।
जनपद की पांच नहरों में पानी छोड़ दिया गया है। इससे जुड़े 27 रजवाहों में पानी छोड़ दिया गया है। नहरों की बेहतर सफाई कराई गई है। शुरुआत में कम मात्रा में पानी छोड़ा गया है। बाद में पानी की मात्रा बढ़ा दी जाएगी।
रविंद्र चौधरी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग