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वाहिद हत्याकांड: अदालत ने 12 दोषियों को सुनाई उम्र कैद की सजा, 50-50 हजार रुपये का लगाया अर्थ दंड

Tue, 19 Aug 2025 02:09 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर

सार

14 अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजीत सिंह श्योराण के न्यायालय ने वाहिद की हत्या के मामले में 12 आरोपी फरीद, असगर, इस्तखार, फारूख, खलील, चमन, वाहिद, साजिद, लुकमान, हाजी शाहिद, अनवार और अशरफ को दोषी करार दिया है। इन सभी को अदालत ने आज सजा सुनाई है।
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दोषियों को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रुकनसराय में 13 साल पहले 24 अगस्त 2012 को हुए वाहिद हत्याकांड में अदालत ने मंगलवार को पूर्व सभासद वाहिद समेत सभी 12 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही जिला जज मंजीत सिंह श्यौराण ने इन सभी पर अलग-अलग धाराओं में करीब 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषी न्यायालय से मुरझाए चेहरे लेकर पुलिस कस्टडी में बाहर निकले। इसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

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नगर के मोहल्ला रुकनसराय निवासी रईस से मोहल्ले के ही रहने वाले युसुफ के बेटे रंजिश मानते थे। इसी रंजिश के चलते 21 अगस्त 2012 को युसुफ के बेटों फरीद, आसिफ, शहजाद, कासिम ने रईस के रिश्तेदार खुर्जा निवासी आजाद पर जानलेवा हमला कर उसे घायल कर दिया था। इस घटना का मुकदमा इसी दिन नगर कोतवाली मे दर्ज किया गया। इसी मुकदमे की रंजिश के कारण 24 अगस्त 2012 को खूनी संघर्ष हुआ, जिसमें तमंचे, रिवाल्वर और पिस्टल से फायरिंग की गई। अंधाधुंध फायरिंग से इलाके में भगदड़ मच गई थी। 

इस घटना में रईस के भतीजे वाहिद को गोली लग गई। वाहिद की मौके पर ही मौत हो गई। रईस की तहरीर पर नगर कोतवाली में 15 आरोपियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर उस दौरान जेल भेज दिया गया था। बाद में पुलिस ने सभी 15 अभियुक्तों के खिलाफ जांच पूरी कर चार्जशीट तैयार की और उसे न्यायालय में दाखिल कर दिया था। वर्तमान में यह मुकदमा जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा था। इस मुकदमे में आरोपी याद मोहम्मद, युसुफ और रहीस की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
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गत 14 अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजीत सिंह श्यौराण ने वाहिद की हत्या के मामले में शेष सभी 12 आरोपी फरीद, असगर, इस्तखार, फारूख, खलील, चमन, पूर्व सभासद वाहिद, साजिद, लुकमान, हाजी शाहिद, अनवार और अशरफ को दोषी करार दिया था। साथ ही इन सभी 12 दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया गया था। मामले में सजा के लिए मंगलवार यानि 19 अगस्त की तारीख नियत की गई थी। इसी के चलते सभी दोषियों को मंगलवार को कारागार से जिला न्यायालय में पेश किया गया। जहां, दोपहर करीब एक बजे सजा के प्रश्न पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है।

मुरझाए चेहरे.. कोर्ट के बाहर परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल
जैसे ही न्यायालय ने सभी दोषियों को सजा सुनाई तो उनके चेहरे मुरझा गए। इस दौरान न्यायालय कक्ष के बाहर मौजूद उनके परिजनों की आंखों से आंसू बह निकले। जब सभी दोषियों को ले जाया जा रहा था, तो परिजन दूर से ही उनसे मिलने के लिए गुहार लगाते रहे।

भतीजा नहीं औलाद जैसा था वाहिद, सजा हुई तो मिला सुकुन 
इस मामले में मारे गए युवक वाहिद के चाचा रईस ने ही मुकदमा दर्ज कराया था। 13 साल तक चली इस मुकदमे न्यायालय ने सभी जीवित आरोपियों को दोषसिद्ध किया। जिसके बाद रईस ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था। साथ ही बताया कि मृतक वाहिद उनके बड़े भाई का बेटा है। लेकिन, उन्होंने उसे गोद लिया हुआ था और उसका भरण पोषण किया था। वारदात वाले दिन से करीब छह माह पूर्व उसकी शादी हुई थी औैर मौत के कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया था। उन्हें विश्वास था कि न्यायालय से उन्हें जरूर न्याय मिलेगा, सभी को आजीवन कारावास होने के बाद अब सुकुन मिला है।

न्यायालय परिसर में उमड़ा वादी-प्रतिवादी पक्षों का हुजुम
वाहिद हत्याकांड मामले में बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की ओर से भारी संख्या में उनके परिजन व अन्य मोहल्ले वासी पहुंच गए थे। न्यायालय परिसर से लेकर मुुख्य द्वार तक इस दौरान लोगों को हुजुम उमड़ा रहा। साथ ही न्यायालय कैंटीन पर भी काफी संख्या में लोग एकत्रित रहे।

कोर्ट परिसर बना छावनी
मामला कुरैशी और गद्दी बिरादरी से जुड़ा होने के कारण कोई अव्यवस्था न्यायालय में न हो, इसके लिए मंगलवार को भी भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। एसपी सिटी शंकर प्रसाद समेत, सीओ सिकंदराबाद भास्कर मिश्र, नगर कोतवाल समेत कई थानों के थानेदार व आरक्षी इस दौरान मौजूद रहे। प्रत्येक दोषी के साथ तीन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी उन्हें न्यायालय हवालात से लाने व ले जाने के लिए लगाई गई थी।

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